इजरायल में हुए आम चुनाव में 1973 के बाद सबसे ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई है। इस चुनाव के नतीजे न केवल वहां की सरकार, बल्कि इजरायली शेकेल (Shekel) और भारत के साथ डिफेंस और टेक्नोलॉजी सेक्टर की साझेदारी पर भी गहरा असर डाल सकते हैं।
भारी मतदान और सियासी तस्वीर\n\nइजरायल के आम चुनाव में जनता का उत्साह अपने चरम पर है। मंगलवार को मतदान का आंकड़ा 50 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। दोपहर तक ही करीब 45% मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके थे। 120 सदस्यीय 'नेसेट' (Knesset) के लिए हो रहे इस चुनाव में मुकाबला मौजूदा प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और पूर्व आर्मी चीफ Gadi Eisenkot के बीच देखा जा रहा है।\n\n### मार्केट और करेंसी पर दबाव\n\nग्लोबल निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कोई एक पार्टी स्पष्ट बहुमत हासिल कर पाएगी। अगर संसद त्रिशंकु (split parliament) रहती है, तो राजनीतिक गतिरोध पैदा हो सकता है। इतिहास गवाह है कि ऐसी स्थिति में बजट और जरूरी पॉलिसी फैसलों में देरी होती है, जिसका सीधा असर बिजनेस कॉन्फिडेंस और वहां की करेंसी, इजरायली शेकेल पर पड़ सकता है।\n\n### भारतीय निवेशकों के लिए अहमियत\n\nभारत और इजरायल के बीच डिफेंस, एग्रीकल्चर और वाटर मैनेजमेंट जैसे सेक्टर में मजबूत रिश्ते हैं। नई सरकार के बनते ही इन प्रोजेक्ट्स और टेक्नोलॉजी कोलैबोरेशन की दिशा क्या होगी, यह देखना दिलचस्प होगा। फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) और सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं में बदलाव का असर सीधे तौर पर इन सेक्टर से जुड़े स्टॉक्स और कंपनियों पर देखा जा सकता है।\n\n### आगे की राह\n\nचुनाव के नतीजों के बाद गठबंधन बनाने की प्रक्रिया (coalition-building process) मार्केट के लिए सबसे बड़ा टेस्ट होगी। निवेशकों को सलाह है कि वे फाइनल सीट डिस्ट्रीब्यूशन पर बारीकी से नजर रखें, क्योंकि एक स्थिर सरकार ही पॉलिसी कंटिन्यूटी सुनिश्चित कर सकती है। आगामी कुछ हफ्ते न केवल इजरायल की इकोनॉमी, बल्कि उससे जुड़े ग्लोबल ट्रेड एग्रीमेंट्स की दिशा भी तय करेंगे।