Israel की Central Elections Committee ने हालिया चुनावों में कथित विदेशी फंडिंग के प्रभाव की जांच के आदेश दिए हैं। PM Benjamin Netanyahu द्वारा उठाए गए चुनावी धांधली के दावों के बाद, यह कदम देश में राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।
जांच का दायरा और कारण
इज़राइल की Central Elections Committee ने चुनावों में कथित विदेशी वित्तीय हस्तक्षेप की जांच के लिए सुरक्षा एजेंसी Shin Bet को काम सौंपा है। जस्टिस Noam Sohlberg के निर्देश के बाद यह जांच शुरू की गई है। दरअसल, प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और Likud पार्टी ने बार-बार आरोप लगाए हैं कि चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए बाहरी फंडिंग का सहारा लिया गया है।
गंभीर आरोप और राजनीतिक संकट
Likud पार्टी का दावा है कि चुनाव के दौरान बड़े स्तर पर धांधली हुई है। इसमें वोटर्स को डराने-धमकाने, अवैध सॉफ्टवेयर का उपयोग करने और पोलिंग बूथों पर पैसे बांटने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। पार्टी ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों को कई सबूत सौंपे हैं, जिनमें बैलेट काउंट में गड़बड़ी और डबल वोटिंग का जिक्र है।
इस समय इज़राइल में भारी राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है। Knesset में किसी भी गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पा रहा है। सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का जादुई आंकड़ा पार करना अनिवार्य है, लेकिन फिलहाल कोई भी पक्ष इस स्थिति में नहीं है।
बाजार और निवेशकों पर असर
इन्वेस्टर्स के नजरिए से देखें तो यह राजनीतिक गतिरोध (Political Deadlock) अनिश्चितता बढ़ाता है। लंबे समय तक नेतृत्व का अभाव करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव ला सकता है और विदेशी निवेश की नीतियों को भी प्रभावित कर सकता है। वैश्विक बाजार इन घटनाक्रमों को रक्षा और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिहाज से बारीकी से देख रहे हैं।
चुनाव आयोग ने Shin Bet को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 1 हफ्ते की सख्त समय-सीमा तय की है। अब देखना यह है कि क्या यह जांच नई सरकार के गठन में रुकावट डालेगी या फिर कानूनी कानूनी चुनौती का नया दौर शुरू होगा।
