ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पड़ोसी गल्फ देशों से साफ कह दिया है कि वे अमेरिकी सेना को अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए न करने दें। इस चेतावनी से क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है, जिसका सीधा असर ग्लोबल कमोडिटी मार्केट और एनर्जी सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।
भू-राजनीतिक तनाव और बाजार पर दबाव
ईरान ने एक कड़ा कूटनीतिक संदेश भेजते हुए गल्फ देशों को चेताया है कि वे अमेरिका को अपनी जमीन का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य ऑपरेशन के लिए न करने दें। तेहरान की यह कोशिश क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को अलग-थलग करने की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब 28 फरवरी, 2026 से शुरू हुए संघर्ष के कारण पहले ही एनर्जी सप्लाई चेन में भारी उठा-पटक देखने को मिल रही है।
ओमान वार्ता पर टिकी हैं दुनिया की निगाहें
आने वाले दिनों में ईरान, इराक और गल्फ देशों के बीच ओमान में एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा पर चर्चा होगी। निवेशकों के लिए यह बैठक बेहद अहम है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल की सप्लाई के लिए सबसे क्रिटिकल चोकपॉइंट है।
एनर्जी सेक्टर के लिए जोखिम
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि किसी भी तरह की सैन्य बयानबाजी या सैन्य तैनाती से ग्लोबल ऑयल कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है। हाल ही में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमलों ने क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर की कमजोरी को उजागर किया है।
ईरान के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी पड़ोसी देश ने अमेरिकी सेना की मदद की, तो उसे सीधे तौर पर संघर्ष में शामिल माना जाएगा। अब सभी की नजरें ओमान की बातचीत पर हैं कि क्या वहां से समुद्री सुरक्षा के लिए कोई ठोस समझौता निकल पाता है या तनाव और गहराएगा।
