UN में US प्रेसिडेंट Donald Trump के बयानों के बाद Iran के साथ तनाव बढ़ गया है, जिससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल है। Hormuz जलडमरूमध्य पर बढ़ते खतरे के बीच, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारतीय बाजार के लिए बड़ा रिस्क हो सकता है।
Middle East में तनाव तब और गहरा गया जब संयुक्त राष्ट्र (UN) में US प्रेसिडेंट Donald Trump ने Iran के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। इस भाषण के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल के वॉकआउट से भू-राजनीतिक खाई और चौड़ी हो गई है, जिससे एनर्जी सप्लाई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। भारतीय निवेशकों के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई चेन की स्थिरता है।
Strait of Hormuz पर टिकीं निगाहें
दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल 'चोकपॉइंट' माना जाने वाला Strait of Hormuz अब इस विवाद का केंद्र बन गया है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। किसी भी तरह की सैन्य हलचल या रुकावट का सीधा असर ऑयल प्राइसेस पर पड़ता है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने का मतलब है भारत का आयात बिल बढ़ना, जिससे रुपये पर दबाव पड़ेगा और घरेलू महंगाई (Inflation) और भी भड़क सकती है।
किन स्टॉक्स पर रखें नजर?
निवेशकों को Indian Oil Corporation, BPCL और HPCL जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। जब ग्लोबल क्रूड प्राइसेस तेजी से बढ़ते हैं, तो इन कंपनियों को रिटेल फ्यूल प्राइस और ऑपरेटिंग कॉस्ट के बीच बैलेंस बनाने में मुश्किल होती है, जिसका सीधा असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ता है।
इसके अलावा, एविएशन सेक्टर भी फ्यूल कॉस्ट के प्रति बेहद संवेदनशील है। अगर कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो InterGlobe Aviation (IndiGo) और SpiceJet जैसी एयरलाइंस का प्रॉफिट प्रभावित हो सकता है, क्योंकि उनका बड़ा ऑपरेटिंग खर्च Aviation Turbine Fuel (ATF) पर जाता है।
आगे क्या होगा?
बाजार की नजर अब अमेरिका और Gulf Cooperation Council के बीच होने वाली बातचीत पर है। इसके साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का मूड भी देखना जरूरी होगा, क्योंकि अनिश्चितता के दौर में वे अक्सर सुरक्षित एसेट्स की ओर रुख करते हैं। फिलहाल, Brent Crude की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भारत के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के आधिकारिक बयानों पर नजर रखना ही समझदारी होगी।
