ईरान-अमेरिका तनातनी का तेल पर असर: कीमतों में आई रिकॉर्ड तोड़ उछाल! जानें क्या है पूरा मामला

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
ईरान-अमेरिका तनातनी का तेल पर असर: कीमतों में आई रिकॉर्ड तोड़ उछाल! जानें क्या है पूरा मामला
Overview

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मचा दिया है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दावा है कि तेहरान गुप्त रूप से आर्थिक कारणों से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की कोशिश कर रहा है। इन परस्पर विरोधी खबरों के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जोरदार उछाल आया है, जिससे शिपिंग रूट पर भी खतरा मंडराने लगा है।

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हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बढ़ा दबाव

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती गहमागहमी ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स को एक अस्थिर दौड़ में धकेल दिया है। हाल ही में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $95.28 प्रति बैरल तक पहुंच गईं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वैश्विक तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) व्यापार का करीब 20% इसी जलडमरूमध्य से होता है।

यह दुनिया के लिए ऊर्जा सुरक्षा का सबसे बड़ा खतरा बन गया है, जो 1970 के दशक के तेल झटकों से भी बदतर हो सकता है। जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जो युद्ध-पूर्व के स्तर से काफी नीचे आ गई है। सबसे चिंता की बात यह है कि इस रास्ते का कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं है।

एनर्जी कंपनियों और शिपिंग पर असर

ExxonMobil, Shell, TotalEnergies, और BP जैसी बड़ी ऑयल कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है, खासकर कतर की LNG एक्सपोर्ट और फारस की खाड़ी के तेल उत्पादन में उनकी भागीदारी को देखते हुए।

शिपिंग इंडस्ट्री भी प्रभावित है। Hapag-Lloyd, MSC, Maersk, और CMA CGM जैसी प्रमुख शिपिंग कंपनियाँ अपने जहाजों का रास्ता बदल रही हैं, पोर्ट कॉल्स छोड़ रही हैं, और अरब सागर के लिए माल ढुलाई पर 'वॉर रिस्क सरचार्ज' (War Risk Surcharge) लगा रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, वैश्विक बेड़े का लगभग 10% जहाजों की भीड़ में फंसा हुआ है।

पिछली संकट और आर्थिक बोझ

यह संकट पिछली ऊर्जा झटकों की याद दिलाता है। उदाहरण के लिए, मार्च 2026 में ऐसे ही तनाव भरे माहौल में ब्रेंट क्रूड की कीमतें $126 प्रति बैरल तक पहुँच गई थीं। विश्लेषकों का मानना है कि बाज़ार वर्तमान आपूर्ति और मांग से ज़्यादा राजनीतिक घटनाओं पर प्रतिक्रिया कर रहा है।

इसका असर सिर्फ ऊर्जा पर ही नहीं, बल्कि उर्वरक, एल्युमिनियम और हीलियम जैसी अन्य कमोडिटी (Commodity) पर भी पड़ रहा है। गरीब देशों को ऊँची आयात लागत और महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी मौजूदा समस्याएं और बढ़ रही हैं।

जोखिम के पीछे क्या है?

कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद, रास्ता जोखिम भरा बना हुआ है। ऐसा लगता है कि यह समस्या अमेरिका द्वारा नौसैनिक नाकेबंदी और सैन्य कार्रवाइयों से जुड़े एक बड़े संघर्ष से उपजी है, जिसने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले रास्ते को लंबे समय तक काफी हद तक रोक दिया है।

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन या UAE की फुजैराह पाइपलाइन जैसी वैकल्पिक पाइपलाइनें हैं, लेकिन वे जलडमरूमध्य की महत्वपूर्ण भूमिका को पूरी तरह से नहीं निभा सकतीं। लगातार बनी अनिश्चितता कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव को बढ़ावा दे रही है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.