BRICS Summit Delhi: ईरान और UAE के बीच सुलह की कोशिश, नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर बनी सहमति

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
BRICS Summit Delhi: ईरान और UAE के बीच सुलह की कोशिश, नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर बनी सहमति

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS समिट के दौरान ईरान और UAE के नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई है। इस कूटनीतिक पहल से 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' को अंतिम रूप देने में मदद मिली है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा और ट्रेड रूट की स्थिरता के लिहाज से बेहद अहम है।

नई दिल्ली में जारी 18वें BRICS समिट के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) और UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (Sheikh Khaled bin Mohamed bin Zayed Al Nahyan) के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत हुई। यह बैठक वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे समिट के संयुक्त परिणामों पर छाए संकट के बादल छंट गए हैं।

भारत की महत्वपूर्ण भूमिका

इस पूरी प्रक्रिया में भारत ने 'बैक-चैनल डिप्लोमेसी' के जरिए अहम भूमिका निभाई। भारतीय राजनयिकों ने तेहरान और अबू धाबी के बीच मतभेदों को कम करने का काम किया, ताकि 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' को सर्वसम्मति से पारित किया जा सके।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

भारतीय निवेशकों और मार्केट के नजरिए से वेस्ट एशिया की स्थिरता सबसे बड़ा फैक्टर है। यह क्षेत्र कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई और ग्लोबल ट्रेड का मुख्य गलियारा है। यदि इन देशों में तनाव बढ़ता है, तो क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में बाधा आने का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। इस बातचीत से फिलहाल उन जोखिमों को मैनेज करने में मदद मिली है।

हालांकि, BRICS के भीतर विभिन्न देशों के अलग-अलग भू-राजनीतिक स्टैंड हैं, जिसके कारण अस्थिरता का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। फिलहाल बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह कूटनीतिक पहल आगे भी जारी रहेगी या यह सिर्फ समिट तक ही सीमित रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.