ईरान ने सुरक्षा और लाइसेंसिंग का हवाला देते हुए तेहरान में एक फ्रेंच भाषा केंद्र को बंद कर दिया है। दोनों देशों के बीच बढ़ा यह राजनयिक तनाव वैश्विक बाजार के लिए चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि मिडिल-ईस्ट में अस्थिरता का सीधा असर क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ता है।
कूटनीतिक विवाद की असली वजह
ईरानी अधिकारियों ने इस फ्रेंच कल्चरल सेंटर पर बिना उचित लाइसेंस के काम करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। यह घटना पेरिस और तेहरान के बीच पहले से ही खराब होते रिश्तों में नई दरार के रूप में देखी जा रही है। फ्रांस ने इस कदम को अपनी सांस्कृतिक उपस्थिति पर हमला करार दिया है और ईरान के राजदूत को तलब किया है।
बाजार पर क्या हो सकता है असर?
इन्वेस्टर और ग्लोबल इकोनॉमिस्ट इस स्थिति को बारीकी से देख रहे हैं। मिडिल-ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) का सीधा संबंध वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से रहा है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है, इसलिए ऐसी घटनाएं भारतीय इकोनॉमी, करेंसी की स्थिरता और शेयर बाजार की सेंटीमेंट पर सीधा असर डाल सकती हैं।
पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच स्टाफ निष्कासन और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर भी तनाव रहा है। फिलहाल, बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में इन दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत से कोई समाधान निकलता है या स्थिति और बिगड़ती है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
