ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी चुनाव नतीजों का उनके देश के साथ संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों और भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान संबंधों में कोई बदलाव नहीं
ईरान के नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि वॉशिंगटन की सत्ता में चाहे किसी भी पार्टी का दबदबा हो, दोनों देशों के बीच की दुश्मनी का सिलसिला वैसा ही रहेगा। अयातुल्ला अली खामेनेई ने उन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिकी चुनावों के बाद नीतिगत बदलाव की संभावना है।
भारतीय निवेशकों के लिए रिस्क
28 फरवरी, 2026 से शुरू हुआ मिडिल ईस्ट का तनाव अब और गहरा गया है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz (होरमुज जलडमरूमध्य) है, जो ग्लोबल ऑयल सप्लाई का एक प्रमुख रूट है। यदि यहाँ किसी तरह की बाधा आती है, तो क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
इकॉनमी और मार्केट पर प्रभाव
- इन्फ्लेशन का खतरा: कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे भारतीय रुपया कमजोर हो सकता है और घरेलू महंगाई बढ़ सकती है।
- सेक्टर पर दबाव: क्रूड के दाम बढ़ने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs), एविएशन, पेंट और केमिकल सेक्टर की कंपनियों के मार्जिन पर भारी दबाव आ सकता है।
निवेशकों को सलाह है कि वे Brent Crude की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल पर पैनी नजर रखें। आने वाले हफ्तों में किसी भी तरह की भू-राजनीतिक हलचल पोर्टफोलियो में अस्थिरता पैदा कर सकती है, इसलिए मार्केट के रुख को समझकर ही आगे बढ़ें।
