अमेरिका का सैन्य अभियान और ईरान का रुख
"प्रोजेक्ट फ्रीडम" के तहत अमेरिकी सेना की यह तैनाती होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं पहले से ही दबाव में हैं और बड़े सैन्य टकराव की आशंकाएं बढ़ रही हैं। इस ऑपरेशन में 15,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी, गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर (guided-missile destroyers) और 100 से अधिक विमान शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि यह ईरान के कथित जलमार्ग को अवरुद्ध करने के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई है।
तेल की कीमतों में उछाल और आर्थिक असर
इस सैन्य तैनाती की खबरों का तत्काल असर तेल की कीमतों पर दिखा। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) 5.8% उछलकर $114.44 प्रति बैरल और WTI 4.4% बढ़कर $106.42 प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह बाज़ार की चिंताओं को दर्शाता है। वहीं, ईरान ने अपनी ओर से एक नया नेविगेशन फ्रेमवर्क (navigational framework) पेश किया है और विदेशी सैन्य उपस्थिति के खिलाफ चेतावनी दी है, जिससे टकराव और बढ़ गया है।
सप्लाई चेन और वैश्विक व्यापार पर संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य से हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक समुद्री तेल शिपमेंट का लगभग 20% है। यहां किसी भी तरह की रुकावट से न केवल तेल की कीमतें बढ़ती हैं, बल्कि पेट्रोकेमिकल्स, उर्वरक और धातुओं जैसे औद्योगिक सामानों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं भी बुरी तरह प्रभावित होती हैं। खासकर एशियाई अर्थव्यवस्थाएं, जो मध्य पूर्व से ऊर्जा पर बहुत अधिक निर्भर हैं, इस स्थिति से ज्यादा प्रभावित होती हैं।
क्या सफल होगा 'प्रोजेक्ट फ्रीडम'?
हालांकि अमेरिका ने जहाजों की सुरक्षा का वादा किया है, लेकिन इस पहल की सफलता पर संदेह है। ईरान के तेज हमलावर जहाज (fast attack boats), ड्रोन और मिसाइलें एक अलग तरह का खतरा पेश करते हैं, जिसे आधुनिक नौसैनिक तकनीक से पूरी तरह निपटना मुश्किल हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की भूमिका 1980 के दशक के "टैंकर वॉर" (Tanker War) से अलग है, जहां उद्देश्य स्पष्ट था। वर्तमान में, अमेरिका पर सीधे टकराव में फंसने का जोखिम है।
कूटनीति की ओर कदम?
हालांकि, कुछ प्रगति के संकेत भी मिले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद ईरान के साथ एक "बड़ी प्रगति" के संकेत देते हुए "प्रोजेक्ट फ्रीडम" में एक ठहराव (pause) की घोषणा की है। यह एक संभावित डी-एस्केलेशन (de-escalation) का संकेत देता है, लेकिन मूल राजनीतिक अस्थिरता अभी भी बनी हुई है। इस जलमार्ग में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता होगी।
