नई दिल्ली में चल रहे BRICS समिट में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने पश्चिम एशिया में तनाव को लेकर सख्त रुख अपनाया है। भारतीय निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम क्रूड ऑयल की कीमतों, चाबहार पोर्ट और वैश्विक व्यापार के नए समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम है।
नई दिल्ली में आयोजित 2026 BRICS समिट के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने वैश्विक मंच का उपयोग करते हुए अमेरिका और इजरायल की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। हालांकि यह बयान भू-राजनीतिक दृष्टि से चर्चा में है, लेकिन बाजार के जानकारों की नजर इसके आर्थिक नतीजों पर टिकी है, खासकर एनर्जी सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय ट्रेड फाइनेंस को लेकर।
चाबहार पोर्ट और कनेक्टिविटी
राष्ट्रपति की यात्रा का मुख्य केंद्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चाबहार पोर्ट पर द्विपक्षीय बातचीत रही। भारत के लिए यह इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट सेंट्रल एशिया तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण द्वार है। ईरान इस साझेदारी को पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के खिलाफ एक ढाल के रूप में देख रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए इस बंदरगाह का संचालन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भविष्य में आने वाली लॉजिस्टिक बाधाओं के खिलाफ एक बड़ा रणनीतिक निवेश है।
एनर्जी मार्केट और जोखिम
पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ता है। राष्ट्रपति के बयान और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा पर चर्चा सप्लाई चेन में बाधाओं के जोखिम को बढ़ाती है। भारत ऊर्जा का बड़ा आयातक है, ऐसे में तनाव बढ़ने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इतना ही नहीं, इसका सीधा असर एविएशन, पेंट और टायर जैसे सेक्टर पर भी पड़ता है, जो कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील हैं।
BRICS और नए फाइनेंशियल मैकेनिज्म
ईरान के राष्ट्रपति ने BRICS देशों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया है। सदस्य देश पश्चिमी वित्तीय नेटवर्क्स से हटकर नए पेमेंट सिस्टम तलाश रहे हैं, जो भविष्य में ट्रेड सेटलमेंट और करेंसी मार्केट को प्रभावित कर सकते हैं। यह बदलाव धीरे-धीरे हो रहा है, लेकिन उन मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है जिनका निर्यात और आयात का कारोबार ज्यादा है।
आने वाले दिनों में ओमान जैसे क्षेत्रीय खिलाड़ियों के साथ समुद्री बातचीत के नतीजे और चाबहार रूट पर व्यापार विस्तार की रिपोर्ट पर निवेशकों की नजर रहेगी।
