भारत में आयोजित BRICS समिट के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका द्वारा सत्ता बदलने की तमाम कोशिशें नाकाम रही हैं। इस बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका की 'Operation Economic Outcast' नीति से ग्लोबल सप्लाई चेन और एनर्जी मार्केट पर गहरा असर पड़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर भारत की महंगाई पर पड़ सकता है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि तेहरान में शासन बदलने के लिए अमेरिका द्वारा किए गए प्रयास पूरी तरह विफल रहे हैं। भारत में BRICS समिट के दौरान उन्होंने वेनेजुएला और सीरिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वॉशिंगटन को उम्मीद थी कि सैन्य और बुनियादी ढांचे पर हमले के बाद ईरान की सरकार गिर जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसके विपरीत, वहां की आंतरिक एकता और मजबूत हुई है।
'Operation Economic Outcast' से बढ़ा तनाव
अमेरिकी सरकार ने 'Operation Economic Outcast' नामक नीति के जरिए ईरान पर दबाव और बढ़ा दिया है। यह पहल विशेष रूप से ईरानी एयरलाइंस और मुख्य ट्रेड रूट्स को निशाना बना रही है। ईरान के अनुसार, इन प्रतिबंधों के कारण व्यापार वॉल्यूम में 25% से 35% तक की गिरावट आई है। राष्ट्रपति ने इन कदमों को 'आर्थिक गला घोंटने' वाला बताया है, जिससे आम जनता के लिए भोजन और दवाइयों की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है।
एनर्जी मार्केट और भारत पर क्या होगा असर?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। निवेशकों की नजरें 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर टिकी हैं, जो दुनिया भर में तेल सप्लाई का एक प्रमुख रास्ता है। यदि इस क्षेत्र में कोई भी खलल पड़ता है, तो कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
इससे भारत में ओएमसी (OMC), एविएशन और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स के ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ सकते हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ती अस्थिरता का सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग इनपुट कॉस्ट और घरेलू महंगाई पर पड़ने का जोखिम है। बाजार अब इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या ये सप्लाई चेन बाधाएं लंबी खिंचेंगी या स्थिति सामान्य होगी।
