ईरान के परमाणु प्रमुख Mohammad Eslami को UN की पाबंदियों के कारण वियना में होने वाली IAEA कॉन्फ्रेंस में जाने से रोक दिया गया है। यह घटनाक्रम ईरान के परमाणु नियमों के उल्लंघन के चलते UN सिक्योरिटी काउंसिल में रेफरल के बाद आया है, जो ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता बढ़ा सकता है।
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख, Mohammad Eslami, वियना में आयोजित होने वाली वार्षिक International Atomic Energy Agency (IAEA) जनरल कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हो पाएंगे। उनके शामिल न हो पाने की सीधी वजह संयुक्त राष्ट्र की वे यात्रा पाबंदियां हैं, जो अब भी प्रभावी हैं। ऑस्ट्रिया सरकार ने उनके लिए विशेष छूट की मांग की थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नियमों के सख्त पालन के कारण इसे मंजूर नहीं किया गया।
यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब कूटनीतिक तनाव चरम पर है। सितंबर 2026 में, IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने ईरान को UN सिक्योरिटी काउंसिल के पास भेजने के लिए वोट किया था। यह फैसला ईरान द्वारा परमाणु सुविधाओं तक पहुंच न देने और समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक पर स्पष्टता न होने के कारण लिया गया था।
जून 2025 से एक 'वेरिफिकेशन ब्लैकआउट' की स्थिति बनी हुई है। ईरान के परमाणु साइटों पर हमलों के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को महत्वपूर्ण सुविधाओं तक पहुंच नहीं मिल पा रही है। उस समय तक की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास 440.9 किलोग्राम यूरेनियम 60 फीसदी शुद्धता के साथ था, लेकिन निगरानी न होने के कारण अब सही स्थिति का पता लगाना मुश्किल है।
निवेशकों के लिए क्या हैं जोखिम?
भारत जैसे देशों के लिए, जो कच्चे तेल के बड़े आयातक हैं, यह स्थिति चिंताजनक है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ता है। इससे तेल विपणन कंपनियों, एयरलाइंस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है और महंगाई के आंकड़े बिगड़ सकते हैं। साथ ही, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी द्वारा लागू किया गया 'स्नैपबैक' मैकेनिज्म, जिसके तहत UN प्रतिबंध फिर से बहाल किए गए हैं, समाधान की संभावनाओं को और कठिन बना रहा है।
