US Naval Blockade के चलते तनाव चरम पर है। ईरान ने अपने मिलिट्री प्रोग्राम के तहत 6 लाख से अधिक वालंटियर्स को एकजुट किया है। यह घटनाक्रम Persian Gulf में एनर्जी सप्लाई चेन के लिए बड़ा रिस्क पैदा कर रहा है।
तेहरान ने शुक्रवार को एक बड़े पैमाने पर मिलिट्री मोबिलाइजेशन की शुरुआत की है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, 6,00,000 से अधिक नागरिकों ने Islamic Revolutionary Guard Corps और Basij पैरामिलेट्री फोर्स को सपोर्ट करने के लिए कॉम्बैट ट्रेनिंग में रजिस्टर किया है। यह कदम महीनों से जारी अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के जवाब में आया है।
एनर्जी सप्लाई चेन पर बड़ा खतरा
यह घटनाक्रम ग्लोबल मार्केट के लिए चिंता का विषय है क्योंकि इसका सीधा असर Persian Gulf पर पड़ेगा। Strait of Hormuz, जो ग्लोबल ऑयल शिपमेंट का सबसे प्रमुख रास्ता है, वहां बढ़ती सैन्य हलचल से मैरीटाइम सप्लाई में रुकावट का खतरा बढ़ गया है। ग्लोबल निवेशकों के लिए, यह अनिश्चितता क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और शिपिंग इंश्योरेंस की लागत को 5% से 10% तक बढ़ा सकती है।
इकोनॉमिक और पॉलिटिकल दबाव
ईरान की सरकार इस वक्त कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रही है, जिससे ट्रेड रूट्स प्रभावित हुए हैं। सरकार का कूटनीतिक बातचीत के बजाय डिफेंस-फर्स्ट पॉलिसी को चुनना उनके सख्त रुख को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए जरूरी Monitorables
कमोडिटी मार्केट में निवेश करने वालों को तीन प्रमुख संकेतों पर नजर रखनी चाहिए:
- क्रूड ऑयल की कीमतों में आने वाली वोलाटिलिटी।
- Persian Gulf में कमर्शियल टैंकरों की आवाजाही में किसी भी तरह का बदलाव।
- नेवल ब्लॉकेड और कूटनीतिक वार्ताओं पर आधिकारिक बयान।
सबसे बड़ा रिस्क एनर्जी ट्रांजिट कॉरिडोर में किसी भी लंबी रुकावट का है, जो समुद्री लॉजिस्टिक्स पर निर्भर कंपनियों के ऑपरेशनल खर्च को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।
