ईरान ने तेहरान में 'Janfada' नाम का सिविलियन कॉम्बैट ट्रेनिंग प्रोग्राम लॉन्च किया है। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह कदम निवेशकों के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बड़े जोखिम पैदा कर सकता है।
ईरान ने आधिकारिक तौर पर तेहरान के केंद्रों में 'Janfada' नाम से एक सिविलियन मिलिट्री ट्रेनिंग प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस पहल का लक्ष्य नागरिकों, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, को राष्ट्रीय रक्षा के लिए तैयार करना है। उन्हें हैंडगन चलाने, एंटी-एयरक्राफ्ट इक्विपमेंट के इस्तेमाल और बाधाओं को पार करने जैसी ट्रेनिंग दी जा रही है। 'Basij' ऑर्गेनाइजेशन इस प्रोग्राम को मैनेज कर रही है, जिसने संकेत दिया है कि इस मोबिलाइजेशन एफर्ट के तहत लगभग 1,000 बटालियनों को तैयार किया जा रहा है।
क्यों है भारतीय निवेशकों के लिए चिंता?
यह घटनाक्रम भू-राजनीतिक तनाव के बीच हो रहा है। फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह संघर्ष अब एक गंभीर मोड़ पर है। भारतीय निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क 'Strait of Hormuz' है, जो तेल और गैस के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग है। यदि यहां कोई बाधा आती है, तो ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आ सकता है।
इकॉनमी पर क्या होगा असर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात करता है। क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार तेजी आने से घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा, जिससे कॉर्पोरेट मार्जिन, महंगाई और राजकोषीय घाटा प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, यदि युद्ध का दायरा बढ़ता है, तो इंटरनेशनल ट्रेड पर निर्भर कंपनियों के लॉजिस्टिक खर्च बढ़ जाएंगे। मार्केट में अनिश्चितता का माहौल है, जिससे निवेशक सुरक्षित एसेट की ओर भाग सकते हैं।
