ईरान के 'Pickaxe Mountain' परमाणु ठिकाने पर सैटेलाइट तस्वीरों से निर्माण कार्य तेज होने के संकेत मिले हैं। अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की धमकियों ने मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया है, जिसका असर भारतीय बाजार और क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ सकता है।
जमीन के नीचे छिपी परमाणु चुनौती
मिड-2026 की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान के नतान्ज के पास स्थित 'Pickaxe Mountain' (Kuh-e Kolang Gaz La) परमाणु कॉम्प्लेक्स में हलचल बढ़ गई है। यहाँ न केवल टनल के रास्तों को मजबूत किया गया है, बल्कि नई सड़कें भी बनाई गई हैं। CSIS के विशेषज्ञों का मानना है कि इस ठिकाने का ढांचा तैयार किया जा रहा है, जो ग्रेनाइट की गहरी परतों के नीचे दबा है और इसे साधारण सैन्य हमलों से भेदना बेहद मुश्किल है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
यह निर्माण ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक तल्खी अपने चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साइट पर संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है, क्योंकि आशंका है कि यहाँ हजारों सेंट्रीफ्यूज रखे जा सकते हैं। जवाब में ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर उनके परमाणु ढांचे पर हमला हुआ, तो संघर्ष का दायरा पूरे मिडिल ईस्ट तक फैल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
दुनिया भर के निवेशकों के लिए चिंता का सबसे बड़ा कारण 'Strait of Hormuz' है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का मुख्य गलियारा है। यदि यहाँ सैन्य संघर्ष शुरू होता है, तो क्रूड ऑयल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आना तय है। इसका सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल पर पड़ेगा, जिससे महंगाई और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
भारतीय शेयर बाजार में जियोपॉलिटिकल झटकों के समय अक्सर विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) बिकवाली करते हैं। फिलहाल, निवेशकों को होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और अमेरिका-ईरान के बीच सैन्य बयानों पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
