ईरान के दूतावास ने अमेरिका और इजराइल पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया है। इस भू-राजनीतिक तनाव का असर ग्लोबल क्रूड ऑयल कीमतों पर दिख रहा है, हालांकि अमेरिका से मिल रहे संकेतों ने फिलहाल बाजार को कुछ राहत दी है।
नई दिल्ली में ईरान के दूतावास ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिका और इजराइल की सैन्य नीतियों की कड़ी आलोचना की है। इस बयान में इन दोनों देशों को पश्चिम एशिया में फैली अस्थिरता का मुख्य कारण बताया गया है, जिससे साल 2026 की कूटनीतिक तनातनी और बढ़ गई है।
क्रूड ऑयल मार्केट पर असर
फरवरी 2026 से शुरू हुए इस तनाव का सीधा असर एनर्जी मार्केट्स पर देखा जा रहा है। ट्रेडर 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर किसी भी प्रकार के सप्लाई डिसरप्शन पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा करता है।
वाशिंगटन के संकेतों से मिली राहत
मार्केट के लिए फिलहाल राहत की खबर वाशिंगटन से आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि 3 नवंबर, 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य हमले को मंजूरी नहीं दी जाएगी। इस बयान के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें, जो हाल ही में $105 प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच गई थीं, उनमें अब कुछ नरमी देखने को मिली है।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
भले ही अभी कूटनीतिक स्तर पर एक 'पॉज' दिख रहा हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र अभी भी काफी संवेदनशील है। किसी भी प्रकार की गलत गणना अचानक बड़े तनाव को जन्म दे सकती है। निवेशकों के लिए चिंता का विषय यह है कि यदि ऊर्जा आपूर्ति में कोई बड़ी बाधा आती है, तो उद्योगों की लागत बढ़ेगी। इससे ग्लोबल लेवल पर महंगाई बढ़ सकती है, जिसका असर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की आने वाली ब्याज दरों की नीति पर पड़ना तय है।
