Pakistan-occupied Kashmir (PoK) में इंटरनेट सेवाएं पिछले 100 दिनों से पूरी तरह बंद हैं। जून 2026 में शुरू हुए सिविल अशांति के बाद लगे इस बैन ने वहां के डिजिटल कॉमर्स, बैंकिंग और शिक्षा व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
100 दिनों का लंबा अंधेरा
PoK में इंटरनेट पर लगा यह प्रतिबंध 5 जून 2026 से जारी है। यह शटडाउन तब शुरू हुआ जब Jammu Kashmir Joint Awami Action Committee (JKJAAC) के नेतृत्व में राजनीतिक सुधारों की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। आज स्थिति यह है कि मोबाइल डेटा और ब्रॉडबैंड सेवा पूरी तरह से ठप है, जिसका सीधा असर वहां की रोजमर्रा की जिंदगी और बिजनेस पर पड़ रहा है।
बिजनेस और एजुकेशन पर भारी मार
आज का आधुनिक बिजनेस पूरी तरह से डिजिटल कनेक्टिविटी, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और सप्लाई चेन मैनेजमेंट पर टिका है। इंटरनेट बंद होने के कारण छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा असर छात्रों पर पड़ा है, जहाँ रजिस्ट्रेशन पोर्टल न खुलने और ऑनलाइन स्टडी मटीरियल न मिल पाने की वजह से कई एंट्रेंस एग्जाम्स को बार-बार टाला जा रहा है।
हाई कोर्ट का दखल
क्षेत्रीय सरकार, जिसके मुखिया प्रधानमंत्री Syed Iftikhar Ali Gillani हैं, का कहना है कि सुरक्षा और लॉ एंड ऑर्डर के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। हालांकि, अब वहां की हाई कोर्ट ने मामले में दखल देते हुए प्रशासन को 10 दिनों के भीतर इंटरनेट सेवाएं बहाल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने केवल उन चुनिंदा इलाकों में छूट की बात कही है जहां कानून-व्यवस्था का जोखिम ज्यादा है।
आगे क्या होगा?
इन्वेस्टमेंट और इकोनॉमिक स्टेबिलिटी के लिहाज से यह स्थिति काफी चिंताजनक है। लंबे समय तक इंटरनेट का बंद रहना यह दिखाता है कि वहां का रेगुलेटरी एनवायरनमेंट कितना अनिश्चित है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार कोर्ट की डेडलाइन का पालन करती है या इस प्रतिबंध को और आगे बढ़ाया जाता है।
