कारनेगी एंडोमेंट के सर्वे के अनुसार, 3 नवंबर, 2026 के मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले भारतीय-अमेरिकी मतदाता भारी अंतर से Democrats का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, एक दिलचस्प पेंच यह है कि अमीर डोनर्स ने Republican गुटों को कहीं ज्यादा फंडिंग दी है, जो भविष्य में H-1B वीजा और ट्रेड पॉलिसी पर असर डाल सकता है।
बदलता राजनीतिक समीकरण
कारनेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस और YouGov के नए सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। हाउस रेस में 62% भारतीय-अमेरिकी मतदाता Democrats के समर्थन में हैं, जबकि Republican के साथ केवल 19% लोग हैं। सीनेट के चुनावों में भी डेमोक्रेट्स 63% के साथ मजबूती से आगे हैं, जो पिछले चुनावों के ट्रेंड से बिल्कुल उलट है।
पैसा बनाम वोट का खेल
सर्वे का सबसे दिलचस्प पहलू 'कैंपेन फाइनेंस' है। जहां आम वोटर डेमोक्रेट्स के साथ दिख रहा है, वहीं अमीर भारतीय-अमेरिकी डोनर्स ने Republican-लिंक्ड PACs को जमकर चंदा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फंडिंग में 4:1 का बड़ा फासला है। यह विरोधाभास कम्युनिटी के लिए एक जटिल राजनीतिक स्थिति पैदा कर रहा है।
बाजार और निवेशकों के लिए मायने
निवेशकों की नजर इन नतीजों पर इसलिए है क्योंकि इसका सीधा असर H-1B वीजा नियमों और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर पड़ सकता है। अगर कांग्रेस बंटी हुई (Divided Congress) रहती है, तो ट्रेड और टेक्नोलॉजी से जुड़ी नीतियों में देरी हो सकती है। जो आईटी कंपनियां और ग्लोबल बिजनेस सीमा पार प्रतिभाओं (Cross-border talent) पर निर्भर हैं, उन्हें चुनावी नतीजों के बाद बनने वाले नए रेगुलेटरी माहौल पर पैनी नजर रखने की जरूरत होगी।
