3 नवंबर, 2026 को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले एक बड़े सर्वे में सामने आया है कि **66%** भारतीय-अमेरिकी वोटर्स डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को समर्थन देने की योजना बना रहे हैं। महंगाई और आर्थिक नीतियों को लेकर उपजी चिंताएं इस बदलाव की मुख्य वजह बताई जा रही हैं।
आर्थिक चिंताएं और वोटिंग का रुख\n\nअमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नजदीक आते ही भारतीय-अमेरिकी समुदाय की राजनीतिक पसंद में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, 66% भारतीय-अमेरिकी वोटर सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में हैं। इस बदलाव का मुख्य कारण बढ़ती महंगाई और जीवन यापन का खर्च है, जिसे 90% सर्वे प्रतिभागियों ने अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया है। इसके अलावा, 70% से 74% लोग डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर नकारात्मक राय रखते हैं।\n\n### ट्रेड और इमिग्रेशन पर क्या होगा असर?\n\nभारतीय निवेशकों और प्रोफेशनल्स के लिए ये नतीजे बेहद महत्वपूर्ण हैं। कांग्रेस (Congress) के नियंत्रण में बदलाव से H-1B वीजा नियमों, इमिग्रेशन कानूनों और ट्रेड एग्रीमेंट्स पर सीधा असर पड़ सकता है। भारतीय-अमेरिकी समुदाय हमेशा से एक 'स्विंग कॉन्स्टिट्यूएंसी' रहा है, और अब यह समुदाय आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है।\n\n### चुनावी सक्रियता और बाजार का नजरिया\n\nवोटर्स की सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 92% रजिस्टर्ड भारतीय-अमेरिकी वोटर्स ने चुनाव में भाग लेने की इच्छा जताई है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स और निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस का नया स्वरूप ग्लोबल ट्रेड और आउटसोर्सिंग सेक्टर के लिए नई चुनौतियां या अवसर पैदा करेगा। चुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि आने वाले समय में फॉरेन इन्वेस्टमेंट और लेबर मूवमेंट से जुड़ी नीतियों की दिशा क्या होगी।