भारत-पाकिस्तान विवाद: नरोवाल में सदियों पुराने हिंदू मंदिर को ढहाने पर मचा बवाल

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AuthorAditya Rao|Published at:
भारत-पाकिस्तान विवाद: नरोवाल में सदियों पुराने हिंदू मंदिर को ढहाने पर मचा बवाल

नरोवाल में एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को ढहाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। भारत ने इसे सुनियोजित तोड़फोड़ बताया है, जबकि पाकिस्तान का दावा है कि ढांचा जुलाई में मॉनसून की बारिश के कारण गिरा। स्थानीय समूहों का आरोप है कि जमीन का इस्तेमाल एक मदरसे के विस्तार के लिए किया गया है, जिससे विरासत के संरक्षण पर सवाल उठ रहे हैं।

पाकिस्तान के नरोवाल जिले के सिराज गांव में स्थित एक सदियों पुराने हिंदू मंदिर के विनाश को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक गतिरोध पैदा हो गया है। सितंबर 2026 की शुरुआत में सामने आई इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में इसे एक जानबूझकर की गई तोड़फोड़ करार देते हुए अल्पसंख्यक सांस्कृतिक विरासत स्थलों की सुरक्षा में विफलता पर चिंता जताई है।

दावों में विरोधाभास और सरकारी रुख

विवाद का केंद्र मंदिर के गिरने का कारण और समय है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने तोड़फोड़ के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। इस्लामाबाद का दावा है कि ढांचा 21 जुलाई, 2026 को भारी बारिश में गिरा था, जो कि कथित तोड़फोड़ की तारीख 21 अगस्त से एक महीना पहले की है। इस दावे का समर्थन 'इवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड' (Evacuee Trust Property Board) कर रहा है, जो बंटवारे के बाद छोड़ी गई संपत्तियों का प्रबंधन करता है।

इसके विपरीत, भारतीय अधिकारियों का मानना है कि यह धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की एक व्यवस्थित कोशिश है। आरोप है कि मंदिर को कुदरती आपदा के बजाय बगल में बने एक मदरसे के विस्तार के लिए जमीन खाली करने की नीयत से गिराया गया।

क्षेत्रीय तनाव और स्थानीय आरोप

पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी के सदस्यों समेत कई स्थानीय चश्मदीदों का दावा कुछ और ही बयां करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह साजिश 'तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान' (TLP) से जुड़े लोगों द्वारा रची गई, ताकि लगभग 1,000 वर्ग मीटर के भूखंड पर मदरसा सुविधाओं का विस्तार किया जा सके। हालांकि सरकार ने नुकसान के आकलन के बाद बहाली की बात कही है, लेकिन इस घटना ने अल्पसंख्यक धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

निवेशकों और क्षेत्रीय स्थिरता पर नजर रखने वालों के लिए यह घटना सीमा पार राजनयिक संबंधों में अस्थिरता का संकेत है। हालांकि इसका सीधा असर शेयर बाजार पर नहीं है, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ता राजनयिक तनाव अक्सर रिस्क असेसमेंट का हिस्सा होता है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि दोनों सरकारें इस विवाद को कैसे संभालती हैं और विरासत संरक्षण पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.