विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के साथ कुछ 'डिप्लोमैटिक बम्प्स' (diplomatic bumps) की ओर इशारा किया है। 'Sanctioning Russia and Iran Act' के तहत भारतीय आयात पर **100%** तक टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है, जिससे निवेशक चिंतित हैं।
कूटनीतिक तनाव की जड़
न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती कूटनीतिक दूरी पर चिंता जताई है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 25 सितंबर 2026 को फोन पर बातचीत हुई है, लेकिन 'Sanctioning Russia and Iran Act' (SRIA) ने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा दिया है।
क्या है निवेशकों के लिए जोखिम?
इस अमेरिकी एक्ट में ऐसे प्रावधान हैं जो रूसी ऊर्जा की खरीद के चलते भारतीय आयात पर 100% तक का भारी टैरिफ लगा सकते हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह स्थिति भारतीय निर्यातकों के लिए अनिश्चितता का बड़ा कारण है। निवेशकों को अब इस पर नजर रखनी होगी कि क्या सरकार इन टैरिफ से बचने के लिए कोई विशेष छूट (waiver) हासिल कर पाती है या नहीं।
क्या ट्रेड डील से मिलेगी राहत?
इतने तनाव के बावजूद आर्थिक मोर्चे पर कुछ उम्मीद की किरणें भी हैं। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के बीच एक व्यापक ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत लगभग 90% पूरी हो चुकी है। यह इस बात का संकेत है कि पर्दे के पीछे दोनों सरकारें अपने मतभेदों को सुलझाने की कोशिश कर रही हैं।
निवेशकों को अब आधिकारिक बयानों और ट्रेड नेगोशिएशंस के अपडेट्स पर बारीक नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इस डील का फाइनल होना मार्केट में टैरिफ स्टेबिलिटी (tariff stability) के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
