वाणिज्य मंत्रियों की अहम मुलाकात
26 फरवरी 2026 को भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड ल्यूटनिक और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ एक अहम बैठक की। दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से हुई इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा 'फेज-1' द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देना था।
क्यों टली बातचीत? टैरिफ की उलझन
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब अमेरिकी व्यापार नीतियों में काफी उथल-पुथल मची हुई है। दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए पुराने आपातकालीन टैरिफ को अमान्य कर दिया था। इसके जवाब में, अमेरिकी प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का इस्तेमाल करते हुए 24 फरवरी 2026 से एक अस्थायी 10% का वैश्विक टैरिफ लागू कर दिया है, और इसे 15% तक बढ़ाने की भी बात कही जा रही है।
इसके विपरीत, भारत और अमेरिका फरवरी 2026 की शुरुआत में ही एक ऐसे फ्रेमवर्क पर सहमत हुए थे, जिसके तहत भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% किया जाना था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके बाद नए वैश्विक टैरिफ के तत्काल लागू होने से एक विरोधाभासी स्थिति बन गई है। एक ओर जहां दोनों देश समझौते के लिए प्रयासरत हैं, वहीं दूसरी ओर तत्काल व्यापारिक टकराव की स्थिति ने बातचीत को जटिल बना दिया है।
भारतीय निर्यात पर असर का आकलन
इस अचानक बदले माहौल का असर भारतीय निर्यात सेक्टर पर भी पड़ने की आशंका है। सूचना प्रौद्योगिकी (IT), फार्मा, टेक्सटाइल और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे प्रमुख भारतीय निर्यात क्षेत्र 'फेज-1' समझौते के तहत प्रस्तावित 18% टैरिफ दर से लाभान्वित हो सकते थे। यह कटौती भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बहाल करने और वियतनाम, बांग्लादेश व चीन जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त दिलाने में मददगार साबित होती। हालांकि, नए अस्थायी टैरिफ के कारण व्यापारिक योजनाएं और मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं, जिस पर अभी मार्केट बारीकी से नजर रखे हुए है।
आगे का रास्ता
टैरिफ की इस तत्काल अनिश्चितता के बावजूद, दोनों देश अपने अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों पक्षों के वार्ताकार हालिया घटनाक्रमों के निहितार्थों का पुनर्मूल्यांकन करने के बाद वाशिंगटन डी.सी. में फिर से मिलेंगे। उम्मीद है कि मार्च 2026 तक इस समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे और अप्रैल तक इसे लागू कर दिया जाएगा। यह समझौता भारत को एक प्रमुख अमेरिकी सहयोगी के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है।