डील से एक्सपोर्टर्स को बड़ी राहत, बाज़ार में तेज़ी
अमेरिका की ओर से भारतीय सामानों पर टैरिफ (Tariff) में बड़ी कटौती होने की उम्मीद है। यह संभवतः अगले हफ्ते एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के ज़रिए हो सकता है, जो भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में एक अहम मोड़ साबित होगा। इस टैरिफ राहत से भारतीय एक्सपोर्टर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
बाज़ार ने इस खबर पर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। पिछले कारोबारी हफ्ते में Nifty 50 इंडेक्स 3.38% की उछाल के साथ बंद हुआ। भारत के शेयर बाज़ार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) फिलहाल करीब $4.5 ट्रिलियन डॉलर है, जो इस तरह के व्यापारिक समझौतों के महत्व को दर्शाता है। Nifty 50 का मौजूदा P/E (Price-to-Earnings) रेश्यो लगभग 28-30 के स्तर पर है, जो दर्शाता है कि बाज़ार इस ग्रोथ को पहले से ही अपनी वैल्यूएशन में शामिल कर रहा है।
भारत की असली नज़र एडवांस टेक्नोलॉजी पर
हालांकि, टैरिफ में कटौती सिर्फ एक पहलू है। भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक मांग एडवांस टेक्नोलॉजी कंपोनेंट्स, खास तौर पर ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) और Nvidia चिप्स, की सप्लाई को लेकर रियायतें हासिल करना है। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर और डेटा सेंटर के तेज़ी से बढ़ते विस्तार के कारण इन हाई-टेक कंपोनेंट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इन अत्याधुनिक तकनीकों तक आसान पहुंच को भारत के भविष्य के तकनीकी विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मार्च के मध्य तक पूरा होगा समझौता?
इस पूरे व्यापारिक समझौते का एक विस्तृत कानूनी दस्तावेज़ मार्च के मध्य तक तैयार होने की उम्मीद है। यह अहम चरण US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) Jamieson Greer की नई दिल्ली की संभावित यात्रा के दौरान तय हो सकता है।
राह में चुनौतियां भी कम नहीं
सकारात्मक रुझानों के बावजूद, चुनौतियां बनी हुई हैं। अतीत में अमेरिका द्वारा कुछ खास सामानों पर 50% तक टैरिफ लगाने का इतिहास रहा है, जो भविष्य में व्यापारिक तनाव की संभावना को दर्शाता है। भारत हाई-टेक कंपोनेंट्स के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, ऐसे में ग्लोबल सप्लाई चेन में किसी भी तरह की गड़बड़ या भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) भारत के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ प्रतिस्पर्धा भी एक बड़ा कारक है। 'ज़ीरो ड्यूटी कंसेशन' (Zero Duty Concessions) का असल फायदा निर्यातकों को कितना मिल पाता है, इस पर विश्लेषकों की पैनी नज़र रहेगी।
आगे क्या?
आने वाले हफ्तों में, 15 मार्च तक एक व्यापक कानूनी दस्तावेज़ का अंतिम रूप लेना महत्वपूर्ण होगा। भारत को टेक्नोलॉजी इंपोर्ट के मामले में किस तरह की शर्ते मिलती हैं, यह उसकी निर्यात क्षमता और वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में उसकी स्थिति को तय करेगा।