9/11 हमलों की 25वीं बरसी पर भारत और अमेरिका ने आतंक के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि आज बाजार में दिख रही उठापटक का संबंध इस डिप्लोमैटिक बयान से नहीं, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमिक और इंटरेस्ट रेट्स जैसे कारकों से है।
कूटनीतिक मजबूती और रक्षा सहयोग
9/11 हमलों की 25वीं बरसी पर, अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने पेंटागन स्थित नेशनल मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान भारत और अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति को एक बार फिर मजबूती दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस साझेदारी के तहत सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख दोहराया है। रक्षा और इंटेलिजेंस शेयरिंग दोनों देशों के बीच भविष्य के बड़े ग्रोथ एरिया बने हुए हैं।
बाजार के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों को यह स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि आज की बाजार चाल और डिप्लोमैटिक इवेंट्स में कोई सीधा कनेक्शन नहीं है। शुक्रवार को भारतीय बाजारों में जो गिरावट देखी गई, वह पूरी तरह से एक्सटर्नल मैक्रो-इकोनॉमिक कारणों जैसे बढ़ती ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) के बिहेवियर के कारण है।
फिलहाल किसी भी कंपनी के नतीजों या रेगुलेटरी फाइलिंग का इससे कोई ताल्लुक नहीं है। बाजार की नजरें अब ग्लोबल इन्फ्लेशन डेटा और अगली तिमाही के कॉर्पोरेट परफॉरमेंस पर टिकी हैं। रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक निवेश की संभावनाओं के बावजूद, शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के लिए बाजार अभी भी वैश्विक सेंटीमेंट और महंगाई के दबाव से ही तय होगा।
