विदेश मंत्री S Jaishankar और UAE के डिप्टी पीएम Sheikh Abdullah bin Zayed Al Nahyan की मुंबई में हुई मुलाकात के बाद भारत-UAE व्यापार ने **$100 बिलियन** का बड़ा आंकड़ा पार कर लिया है। अब दोनों देश ट्रांजैक्शन कॉस्ट घटाने के लिए 'लोकल करेंसी सेटलमेंट' पर जोर दे रहे हैं, जिस पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।
व्यापार का नया कीर्तिमान
मुंबई में हुई इस उच्च-स्तरीय बैठक में 2022 में हुए 'कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट' (CEPA) के नतीजों पर चर्चा हुई। सबसे बड़ी अपडेट यह है कि भारत और UAE के बीच का द्विपक्षीय व्यापार अब $100 बिलियन का मील का पत्थर पार कर चुका है। इसे हासिल करने के लिए दोनों देशों ने क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन को आसान बनाने पर काम किया है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
दोनों देशों के बीच अब 'लोकल करेंसी सेटलमेंट' और 'बायलैटरल इन्वेस्टमेंट ट्रीटी' का इस्तेमाल बढ़ रहा है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ी राहत है क्योंकि इससे ग्लोबल करेंसी की निर्भरता कम होगी, ट्रांजैक्शन कॉस्ट में कमी आएगी और फाइनेंशियल वोलैटिलिटी (Financial Volatility) के खिलाफ एक सुरक्षा कवच मिलेगा।
डिफेंस और टेक्नोलॉजी पर फोकस
सिर्फ पारंपरिक व्यापार ही नहीं, बल्कि अब एनर्जी, डिफेंस और टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी साझेदारी गहरी हो रही है। भारत के लिए UAE ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत है, और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यह डिप्लोमैटिक चैनल एनर्जी सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए बेहद अहम है। इसके अलावा, डिफेंस एक्सपोर्ट्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी भारतीय कंपनियों के लिए नए प्रोजेक्ट्स के रास्ते खुल सकते हैं।
बाजार के जानकारों का मानना है कि अब निवेशकों को यह देखना होगा कि कैसे यह लोकल करेंसी सिस्टम कंपनियों के मार्जिन को फायदा पहुंचाता है और वेस्ट एशिया की जियोपॉलिटिकल स्टेबिलिटी का कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर क्या असर पड़ता है।
