भारत ने पाकिस्तान के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि उसने चेनाब नदी में जानबूझकर पानी छोड़ा जिससे बाढ़ आई। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि नदी का जलस्तर बढ़ने का कारण भारी मॉनसून बारिश है और यह सब पाकिस्तान के अपने मौसम विभाग के आंकड़ों से भी मेल खाता है।
Detailed Coverage
भारत का कड़ा रुख
विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तान द्वारा भारत पर चेनाब नदी में जानबूझकर पानी छोड़ने के आरोपों का आधिकारिक तौर पर खंडन किया है। मंत्रालय ने साफ किया कि 20 से 23 जुलाई के बीच नदी में पानी का बहाव बढ़ने की वजह पूरी तरह से जम्मू और आसपास के इलाकों में हुई भारी मॉनसून बारिश थी।
सिंधु जल संधि और बढ़ता तनाव
यह विवाद दोनों देशों के बीच 1960 से चली आ रही सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर चल रहे तनाव को दर्शाता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, रणधीर जैसवाल ने कहा कि भारत द्वारा पानी छोड़े जाने के आरोप तकनीकी रूप से निराधार हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान के लाहौर स्थित फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन ने 22 जुलाई को ही यह चेतावनी जारी कर दी थी कि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश ही जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण है। पाकिस्तान की अपनी रिपोर्टों का हवाला देते हुए, नई दिल्ली ने कहा कि यह बाढ़ एक प्राकृतिक मौसमी घटना थी, न कि किसी रणनीतिक जल प्रबंधन का नतीजा।
भविष्य की राह
यह कूटनीतिक मतभेद ऐसे समय में आया है जब भारत ने 2025 में सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था, जिसका कारण पिछले साल अप्रैल में हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद सुरक्षा चिंताएं थीं। यह संधि महीनों से विवाद का मुद्दा बनी हुई है, जिसमें पाकिस्तान इस मुद्दे को आसियान क्षेत्रीय मंच जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश कर रहा है। भारत का रुख हमेशा से यही रहा है कि जल प्रबंधन जैसे द्विपक्षीय मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नहीं उठाया जाना चाहिए।
हालांकि भारत मानवीय आधार पर पाकिस्तान को बाढ़ संबंधी डेटा प्रदान करता रहा है, लेकिन मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में पानी के बहाव का स्तर इतना नहीं बढ़ा था कि मौजूदा प्रोटोकॉल के तहत विशेष बाढ़ अलर्ट जारी किया जाए। नई दिल्ली ने दोहराया कि कूटनीतिक तनाव के बावजूद, वह स्थापित प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देश मानवीय आधार पर जल संबंधी डेटा का आदान-प्रदान जारी रखते हैं या यह कूटनीतिक गतिरोध उनके जल प्रबंधन प्राधिकरणों के बीच संचार को और सीमित कर देता है।
