UNGA के 81वें सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर पर तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन द्वारा की गई टिप्पणी को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ कहा कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और किसी भी बाहरी देश को इसमें हस्तक्षेप का कानूनी अधिकार नहीं है।
संप्रभुता पर भारत की दो-टूक
न्यूयॉर्क में आयोजित 81वें यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA) में तुर्की के राष्ट्रपति ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया। उनके इस बयान के बाद भारत ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जोर देकर कहा कि किसी भी बाहरी शक्ति के पास भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का न तो कोई कानूनी आधार है और न ही कोई अधिकार। भारत सरकार ने हमेशा से ही कश्मीर मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को सिरे से खारिज किया है।
कूटनीतिक तनाव का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली और अंकारा के बीच कूटनीतिक तनाव देखने को मिला है। साल 2019 में अनुच्छेद 370 के बदलाव के बाद से ही एर्दोगन लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाते रहे हैं। इससे पहले हाल ही में भारत ने ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) कॉन्टैक्ट ग्रुप द्वारा जारी एक कम्युनिक को भी खारिज कर दिया था। भारत इसे एक सोची-समझी कोशिश मानता है ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर मुद्दे को बार-बार उठाया जा सके।
व्यापारिक रिश्तों पर असर?
बाजार के जानकारों और नीति निर्माताओं के लिए भारत-तुर्की के कूटनीतिक संबंध अहम हैं। तुर्की पश्चिम एशिया और यूरोप के लिए भारत का एक महत्वपूर्ण ट्रेड पार्टनर है। कूटनीतिक असहमति के बावजूद, टेक्सटाइल्स, मशीनरी और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में व्यापारिक लेनदेन अक्सर स्थिर बने रहे हैं। फिलहाल, निवेशक और ट्रेड एक्सपर्ट्स इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि क्या यह राजनीतिक बयानबाजी भविष्य में द्विपक्षीय व्यापार नीतियों या रणनीतिक साझेदारियों को प्रभावित करेगी। अभी के लिए, व्यावसायिक हितों को देखते हुए व्यापारिक गतिविधियां जारी हैं और स्थिति यथावत है।
