रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने SCO सदस्य देशों से आतंकी नेटवर्क को खत्म करने का आह्वान किया है। साथ ही, भारत ने **2026-2030** के लिए ट्रेड कोऑपरेशन पर अपनी प्रतिबद्धता जताई है, जो मध्य एशिया में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी लक्ष्यों के लिए बेहद अहम है।
सुरक्षा और व्यापार का सीधा कनेक्शन
दुशांबे में आयोजित SCO काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट की बैठक में रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद और उसके फाइनेंशियल नेटवर्क को जड़ से खत्म करना ही क्षेत्र में व्यापारिक स्थिरता की कुंजी है। भारतीय निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि सेंट्रल एशिया में भू-राजनीतिक स्थिरता का सीधा असर भारत के लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर पड़ता है।
रिस्क मैनेजमेंट और ट्रेड पॉलिसी
भारत ने 2026-2030 के लिए बहुपक्षीय व्यापार कार्यक्रम पर अपनी सहमति दी है, लेकिन सरकार ने यह साफ कर दिया है कि आर्थिक एकीकरण तभी सफल होगा जब क्षेत्र सुरक्षित होगा। अस्थिरता के कारण सप्लाई चेन में रुकावट और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने का खतरा बना रहता है। ताशकंद के यूनिवर्सल सेंटर और दुशांबे के एंटी-ड्रग सेंटर को मजबूत करने की भारत की मांग का उद्देश्य क्रॉस-बॉर्डर रेगुलेशंस को पारदर्शी और अनुमानित बनाना है।
कनेक्टिविटी का भविष्य
भारत की 'एक्सटेंडेड नेबरहुड' नीति के तहत International North-South Transport Corridor (INSTC) जैसे प्रोजेक्ट्स ऊर्जा आयात और निर्यात बाजारों में विविधता लाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे देखें कि कैसे ये सुरक्षा वादे आने वाले सालों में ट्रेड पॉलिसी में बदलते हैं। SCO का सुरक्षित वातावरण ही तय करेगा कि 2026-2030 के दौरान भारतीय कंपनियां इन बाजारों में कितनी मजबूती से अपनी पैठ जमा पाती हैं।
