भारत 12-13 सितंबर, 2026 को दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। हालांकि यह आयोजन काफी संयमित है, लेकिन इसके चलते दिल्ली-NCR में होटल रेट्स में जबरदस्त उछाल आया है। निवेशक अब ट्रेड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले समझौतों पर नजर गड़ाए हुए हैं।
भारत 12-13 सितंबर, 2026 को 18वें BRICS लीडर्स समिट की मेजबानी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में होने वाला यह आयोजन resilience, innovation और सहयोग पर केंद्रित है। 2023 की G20 अध्यक्षता के मुकाबले इस बार का आयोजन काफी 'लो-की' रखा गया है, जो एक सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति है। भारत अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों और BRICS ब्लॉक के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।\n\n### होटल इंडस्ट्री में तेजी\n\nइस समिट का सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ने की उम्मीद कम है, लेकिन हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। दिल्ली और एनसीआर में होटलों की भारी मांग के चलते किराए में शार्प इजाफा देखा जा रहा है। डेलिगेट्स और सुरक्षा बलों की भारी भीड़ के कारण होटलों की ऑक्यूपेंसी बढ़ गई है, जिससे इस क्षेत्र की कंपनियों को शॉर्ट-टर्म फायदा मिल सकता है।\n\n### क्या है एजेंडा और भविष्य के संकेत?\n\n1 जनवरी, 2026 से अध्यक्षता संभालने के बाद से भारत अब तक 350 से ज्यादा बैठकें कर चुका है। इस समिट में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी सस्टेनेबिलिटी और ट्रेड में लोकल करेंसी के इस्तेमाल पर मुख्य जोर है। साथ ही, New Development Bank की भूमिका पर भी सबकी नजरें हैं।\n\n### जियो-पॉलिटिकल रिस्क\n\n11 सदस्यों वाले इस विस्तार के बाद आम सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती है। भारत को चीन, रूस और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ तालमेल बिठाते हुए यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका, जो कि भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है, के साथ व्यापारिक रिश्तों पर कोई बुरा असर न पड़े। इन्वेस्टर्स को समिट के बाद आने वाले जॉइंट डिक्लेरेशन और ट्रेड पॉलिसी पर बारीक नजर रखने की सलाह दी जाती है।
