नई दिल्ली में चल रहे BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस बैठक में ट्रेड, कनेक्टिविटी और वेस्ट एशिया में बढ़ती अस्थिरता के बीच एनर्जी सिक्योरिटी पर खास जोर दिया गया।
नई दिल्ली में चल रहे 18वें BRICS समिट के दौरान ग्लोबल लीडर्स आर्थिक मजबूती और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा कर रहे हैं। इसी मंच के इतर, प्रधानमंत्री Narendra Modi और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian की अहम बैठक हुई। यह चर्चा भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह 2026 के आगामी समिट की अध्यक्षता से पहले क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और इकोनॉमिक स्टेबिलिटी को प्राथमिकता दे रहा है।
भारत के लिए क्यों है यह बैठक जरूरी?
भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिहाज से ईरान के साथ मजबूत कूटनीतिक संबंध बेहद अहम हैं। ईरान दुनिया के प्रमुख एनर्जी कॉरिडोर पर स्थित है, और भारत का बड़ा आयात इसी वेस्ट एशियन रीजन की स्थिरता पर टिका है। दोनों नेताओं ने मौजूदा ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद ट्रेड फ्लो को सुगम बनाने और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को रफ्तार देने पर सहमति जताई है।
मार्केट पर असर और चुनौतियां
फिलहाल मिडिल ईस्ट में बढ़ती अस्थिरता और तनाव से इंटरनेशनल मार्केट में चिंता का माहौल है, जिसका सीधा असर एनर्जी की कीमतों पर पड़ रहा है। स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz), जो दुनिया के लिए तेल का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है, इस वक्त ग्लोबल इकोनॉमिक रिस्क का केंद्र बना हुआ है।
निवेशकों और पॉलिसी मेकर्स की नजर इस बात पर है कि ये कूटनीतिक प्रयास कब तक ठोस इकोनॉमिक नतीजों में बदलते हैं। भारत जहां BRICS में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, वहीं उसे वेस्ट एशिया के तनावों के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। आने वाले महीनों में ट्रेड कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स की प्रोग्रेस और एनर्जी प्राइस स्टेबिलिटी पर निवेशकों की पैनी नजर बनी रहेगी।
