भारत अब 18 सदस्यीय Pacific Islands Forum का 'Strategic Partner' बन गया है। इस कदम से भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर और रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों के लिए नए रास्ते खुल गए हैं, जिसमें सोलर प्रोजेक्ट्स और मेडिकल सुविधाओं पर सरकार का खास जोर है।
कूटनीति के साथ व्यापारिक मौके
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इस साझेदारी की पुष्टि की है। यह 18 देशों का समूह है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजी और मार्शल आइलैंड्स जैसे देश शामिल हैं। निवेशकों के लिए यह सिर्फ एक डिप्लोमैटिक जीत नहीं, बल्कि भारतीय कंपनियों के लिए एक नया बाजार खुलने जैसा है।
हेल्थकेयर सेक्टर पर बड़ा दांव
सरकार ने हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बढ़ा दिया है। फिजी में 100 बेड का सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने की योजना है। इसके अलावा, मार्च 2027 तक 12 सदस्य देशों में 20 'सी एम्बुलेंस' (Sea Ambulances) तैनात की जाएंगी। इससे मेडिकल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स और कंसल्टिंग कंपनियों के लिए बड़े टेंडर निकलने की उम्मीद है।
सोलर एनर्जी में बढ़ेगा दबदबा
भारत पहले ही 14 देशों के 2,800 घरों में सोलर इंस्टॉलेशन पूरा कर चुका है। अब सोलर EPC और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए विस्तार का समय है। भारत अपनी किफायती ऑफ-ग्रिड सोलर तकनीक को इन द्वीपों तक पहुंचा रहा है।
रिस्क और चुनौतियां
इन प्रोजेक्ट्स का मुनाफा इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां समुद्री लॉजिस्टिक्स और शिपिंग की चुनौतियों से कैसे निपटती हैं। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि सरकार द्वारा दी जाने वाली 'लाइन्स ऑफ क्रेडिट' (Lines of Credit) से भविष्य में कितने कमर्शियल ट्रेड डील होते हैं। भौगोलिक दूरी और प्रोजेक्ट में देरी एक संभावित जोखिम है, जिसे नकारा नहीं जा सकता।
