नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच भारत ने राहत सामग्री की खेप भेजी है। अब तक **1,259** लोगों की जान जा चुकी है और **5,000** से ज्यादा लोग लापता हैं, जबकि तबाही के बाद पुनर्निर्माण का खर्च **$4 बिलियन** से **$5 बिलियन** के बीच रहने का अनुमान है।
भारत सरकार ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद मानवीय सहायता को तेज करते हुए इस हफ्ते छठी और सातवीं राहत उड़ानें पूरी की हैं। इन उड़ानों के जरिए 21.5 टन वजन की महत्वपूर्ण मेडिकल सामग्री, फॉरेंसिक डीएनए विश्लेषण किट और बचाव उपकरण भेजे गए हैं, जो प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन की मदद करेंगे।
आर्थिक संकट का दायरा
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा ने मानवीय संकट के साथ-साथ एक गंभीर आर्थिक चुनौती भी पेश की है। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को ठीक करने के लिए $4 बिलियन से $5 बिलियन की बड़ी धनराशि की आवश्यकता होगी। नेपाल को अब परिवहन नेटवर्क, संचार लाइनों और ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र पर असर
बाढ़ का सबसे चिंताजनक पहलू नेपाल के हाइड्रोपावर सेक्टर पर पड़ा असर है। कई जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है, जिससे टनल सिस्टम और उपकरण मलबे में दब गए हैं। चूंकि नेपाल की अर्थव्यवस्था में हाइड्रोपावर की भूमिका अहम है और यह क्रॉस-बॉर्डर एनर्जी ट्रेड का केंद्र है, इसलिए इन संपत्तियों की मरम्मत में लंबा समय और भारी पूंजी निवेश लगेगा।
आगे की राह
भारत द्वारा स्थापित लॉजिस्टिक्स चेन नेपाल सरकार को फौरी राहत और दीर्घकालिक पुनर्निर्माण कार्यों में मदद करने के लिए है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और क्षेत्रीय सहयोगी देश अब इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि नेपाल कैसे अपनी बुनियादी ढांचागत संपत्ति को बहाल कर पाता है और इतने बड़े पैमाने पर होने वाले पुनर्निर्माण के आर्थिक बोझ को कैसे प्रबंधित करता है।
