भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का समापन हो गया है। इसमें **11** सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से 'नई दिल्ली घोषणा' को अपनाया है, जो भविष्य में क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिहाज से बेहद अहम है।
शिखर सम्मेलन के मुख्य परिणाम
भारत ने 12-13 सितंबर को भारत मंडपम, नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस समिट में चीन, रूस, ब्राजील और UAE समेत 11 सदस्य देशों के नेता शामिल हुए। इस दौरान सबसे बड़ा अपडेट 'नई दिल्ली घोषणा' (New Delhi Declaration) है, जिसमें 140 पैराग्राफ के जरिए ग्लोबल गवर्नेंस और फाइनेंशियल कोऑपरेशन का रोडमैप तैयार किया गया है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि ये उभरती अर्थव्यवस्थाएं आने वाले समय में ट्रेड बैरियर्स को कैसे कम करेंगी।
फाइनेंशियल संस्थानों पर जोर
समिट में न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को मजबूत करने पर खास जोर दिया गया है। पारदर्शी और जवाबदेह फाइनेंसिंग का लक्ष्य रखा गया है, ताकि मेंबर स्टेट्स में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए कैपिटल का सही इस्तेमाल हो सके। 'बैरियर-फ्री कॉमर्स' और पेमेंट के नए विकल्पों पर काम करना आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
जियोपॉलिटिकल सेंटीमेंट और मार्केट इम्पैक्ट
इस समिट का एक अहम पहलू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत रही। निवेशकों के लिए ऐसी कूटनीतिक स्थिरता का मतलब सप्लाई चेन में कम अनिश्चितता और बेहतर बॉर्डर सिक्योरिटी से है। हालांकि, अलग-अलग देशों के अपने राजनीतिक हित भी हैं, इसलिए इन फैसलों को पॉलिसी में बदलने की रफ्तार पर मार्केट की नजर बनी रहेगी।
आगे निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि इन कागजी समझौतों को धरातल पर कैसे उतारा जाता है। निवेशकों को मुख्य रूप से तीन चीजों पर नजर रखनी होगी: NDB द्वारा फंड का डिस्बर्समेंट, नई द्विपक्षीय ट्रेड डील, और एनर्जी-टेक्नोलॉजी सेक्टर में सहयोग की निरंतरता।
