PoK पर UN के दोहरे रवैये पर भारत का कड़ा प्रहार, मानवाधिकार संस्था से मांगा जवाब

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
PoK पर UN के दोहरे रवैये पर भारत का कड़ा प्रहार, मानवाधिकार संस्था से मांगा जवाब

भारत ने UN मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) के PoK को लेकर अपनाए गए विरोधाभासी रुख पर सवाल उठाए हैं। नई दिल्ली ने संस्था की निष्पक्षता पर निशाना साधते हुए कहा कि वे भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप तो करते हैं, लेकिन पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में इंटरनेट शटडाउन और विरोध प्रदर्शनों पर चुप्पी साधे हुए हैं।

कूटनीतिक स्तर पर भारत की सख्ती

संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं सत्र की तीसरी समिति के दौरान भारत ने अपनी बात मजबूती से रखी। भारत के प्रतिनिधि अनुज स्वरूप ने OHCHR के कामकाज के तरीके पर सवाल खड़े किए और इसे 'चुनिंदा' (Selective) दृष्टिकोण बताया। भारत ने स्पष्ट किया है कि जिन इलाकों में इंटरनेट बंद है और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हो रही हैं, वहां संस्था का न बोलना उसकी विश्वनीयता पर सवाल खड़ा करता है।

जवाबदेही की मांग

भारत ने UN से PoK की स्थिति पर एक औपचारिक रिपोर्ट जारी करने के लिए निश्चित टाइमलाइन मांगी है। जुलाई में हुए क्षेत्रीय चुनावों के दौरान हुई अशांति का मुद्दा पहले भी उठाया गया था, लेकिन उस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। भारत ने जोर देकर कहा है कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न अंग हैं, जहां लोकतांत्रिक ढांचा और न्यायपालिका मौजूद है, जो PoK में पूरी तरह नदारद है।

निवेशकों और बाजार के लिए क्यों है यह जरूरी?

एक राष्ट्र की संप्रभुता और वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति को मजबूती से रखने की क्षमता उसके जियोपॉलिटिकल रिस्क असेसमेंट (Geopolitical Risk Assessment) का हिस्सा है। निवेशकों के लिए देश की दीर्घकालिक स्थिरता बहुत मायने रखती है। भारत का यह स्टैंड वैश्विक संस्थाओं के बीच पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जो लंबे समय में देश की छवि और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.