भारत और कनाडा के बीच ट्रेड एग्रीमेंट की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसी बीच, सरकार ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता को देखते हुए वेनेजुएला के साथ एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security) पर बात कर रही है ताकि क्रूड ऑयल के आयात को और सस्ता और सुरक्षित बनाया जा सके।
भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक और आर्थिक रिश्ते एक नए मोड़ पर हैं। हालिया चर्चाओं से संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देशों के बीच 'Comprehensive Economic Partnership Agreement' यानी CEPA को लेकर कवायद तेज हो गई है। इस समझौते से पोटाश (खाद में इस्तेमाल होने वाला) और दालों जैसे कमोडिटी के कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है। दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित कनाडा यात्रा इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए एक बड़ा ट्रिगर साबित हो सकती है। निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह डील भारतीय सर्विस एक्सपोर्ट के लिए रास्ते खोलेगी और फर्टिलाइजर सेक्टर की लागत कम करने में भी सहायक हो सकती है।
एनर्जी सिक्योरिटी पर बड़ा दांव
व्यापारिक वार्ता के साथ-साथ सरकार का पूरा जोर भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर है। वेनेजुएला, जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, वहां से कच्चे तेल के आयात पर भारत गंभीरता से विचार कर रहा है। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच यह कदम भारत के लिए काफी अहम है। इससे न केवल आयात बिल कम होगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव भी कम होगा।
ओएमसी (OMC) कंपनियों के लिए क्या है संकेत?
इस कदम का सीधा असर Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum, और Hindustan Petroleum जैसी कंपनियों पर पड़ेगा। हालांकि भारत में तेल की कीमतें टैक्स और ग्लोबल बेंचमार्क से तय होती हैं, लेकिन सप्लाई चेन के डायवर्सिफाई होने से इन कंपनियों की लंबी अवधि की प्लानिंग को काफी मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर, यह कूटनीतिक पहल मार्केट में स्थिरता लाने और रुपये पर दबाव कम करने के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
