भारत और कनाडा के बीच हाई-लेवल सिक्योरिटी बातचीत के बाद दोनों देशों के संबंध सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। यह कूटनीतिक सुधार **2026** के अंत तक प्रस्तावित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।
भारत और कनाडा के बीच नई दिल्ली में नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) स्तर की अहम बातचीत संपन्न हुई है, जो दोनों देशों के बीच बिगड़े कूटनीतिक रिश्तों को सामान्य करने की एक कोशिश है। इस वार्ता में भारत के NSA अजीत डोभाल और कनाडा के सीनियर डिप्लोमैटिक एडवाइजर डेविड मॉरिसन ने आतंकवाद, साइबर अपराध और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
बिजनेस और मार्केट के नजरिए से देखें, तो यह 'Predictable' वातावरण की ओर एक सकारात्मक संकेत है। आर्थिक एकीकरण के लिए कूटनीतिक स्थिरता पहली शर्त है। दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने CEPA पर आगे बढ़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इस ट्रेड डील का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करना और इन्वेस्टमेंट फ्लो को आसान बनाना है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो 2026 का साल दोनों देशों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
चुनौतियां और आगे की राह
भले ही सुरक्षा के मोर्चे पर यह एक सकारात्मक शुरुआत है, लेकिन अतीत में दोनों देशों के रिश्तों में रही उठापटक को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि इन सुरक्षा समझौतों को जमीनी स्तर पर कितनी मजबूती से लागू किया जाता है। यदि CEPA बातचीत में देरी होती है या कूटनीतिक रिश्तों में फिर से तनातनी आती है, तो इसका असर आईटी, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टरों पर पड़ सकता है। फिलहाल, अगले कुछ महीनों में आने वाली प्रोग्रेस रिपोर्ट्स मार्केट सेंटीमेंट तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगी।
