भारत और बेल्जियम ने डिफेंस को-प्रोडक्शन, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है।
भारत और बेल्जियम ने औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार किया है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की नई दिल्ली यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपनी तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग ताकत को जोड़ने का फैसला किया है, जो सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा कदम है।
डिफेंस और सेमीकंडक्टर में नई साझेदारी
इस दौरे का सबसे अहम हिस्सा 10 डिफेंस-इंडस्ट्रियल समझौते रहे, जिसमें 15 बेल्जियन कंपनियां शामिल हैं। फोकस एरिया में जोरावर लाइट टैंक, 70mm रॉकेट असेंबली और गोला-बारूद का स्थानीय स्तर पर उत्पादन शामिल है। वहीं, टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बेल्जियम के प्रसिद्ध IMEC इंस्टीट्यूट को भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे भारत की डिजाइनिंग क्षमता में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है।
व्यापार का लक्ष्य और चुनौतियां
दोनों देशों ने अगले 5 साल में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 'इन्वेस्टमेंट फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म' बनाया गया है ताकि बेल्जियन कंपनियों को भारत में काम शुरू करने में बाधाएं न आएं।
निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि ये मेमोरेंडम कितनी जल्दी ठोस ऑर्डर्स और प्रोडक्शन लाइन्स में बदलते हैं। डिफेंस प्रोजेक्ट्स में लंबी अवधि और जटिल रेगुलेटरी मंजूरी की प्रक्रिया होती है, जो प्रोजेक्ट की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है। साथ ही, इन समझौतों का असली असर भारत-यूरोपीय संघ के बीच चल रही फ्री ट्रेड बातचीत और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों पर भी निर्भर करेगा। आगे चलकर, प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी और सरकारी प्रोक्योरमेंट पॉलिसी के साथ इनका तालमेल ही इस सेक्टर की लॉन्ग टर्म वैल्यू तय करेगा।
