ढाका में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी और स्थानीय अधिकारियों के बीच बैठक हुई है। इस मीटिंग का मुख्य मकसद **$13 बिलियन** के सालाना इकोनॉमिक कॉरिडोर में ट्रेड और प्रशासनिक सहयोग को पटरी पर लाना है।
भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने 1 सितंबर, 2026 को ढाका में मिनिस्टर ऑफ लोकल गवर्नमेंट, रूरल डेवलपमेंट एंड कोऑपरेटिव्स अब्दुल मोयीन खान से मुलाकात की। इस चर्चा का केंद्र दोनों देशों के बीच प्रशासनिक और आर्थिक सहयोग को बेहतर बनाना था, ताकि हालिया राजनीतिक तनाव के बावजूद व्यापारिक रिश्ते सुचारू रूप से चल सकें।
ट्रेड स्टेबिलिटी क्यों है जरूरी?
भारतीय निवेशकों के लिए बांग्लादेश के साथ व्यापारिक स्थिरता बेहद अहम है। दोनों देशों के बीच का यह ट्रेड कॉरिडोर लगभग $13 बिलियन का है, जो टेक्सटाइल, कंज्यूमर गुड्स और एनर्जी सेक्टर के लिए लाइफलाइन की तरह है। किसी भी तरह की डिप्लोमैटिक अनबन इन क्षेत्रों की सप्लाई चेन को बाधित कर सकती है, इसलिए मार्केट एक्सपर्ट्स इन बातचीत पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रियों और फाइनेंस एडवाइजर्स के बीच कई राउंड की बैठकें हुई हैं, जो आर्थिक गतिविधियों को जारी रखने की कोशिशों को दर्शाती हैं।
राजनीतिक अनिश्चितता और निवेशकों के लिए संकेत
राजनीतिक माहौल अभी भी संवेदनशील बना हुआ है, जिसमें एक्सट्रैडिशन (Extradition) जैसे कूटनीतिक मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, दिनेश त्रिवेदी ने अपनी बातचीत को पूरी तरह से प्रशासनिक और न्यूट्रल रखा है ताकि ट्रेड पर इसका असर न पड़े। निवेशकों के लिए फिलहाल ट्रेड डेटा और क्रॉस-बॉर्डर लॉजिस्टिक्स की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण मॉनिटरेबल्स हैं। आने वाले समय में प्रशासनिक बाधाएं कितनी तेजी से दूर होती हैं, यही इस महत्वपूर्ण आर्थिक गलियारे की सेहत तय करेगा।
