भारत ने भूटान के **13th Five Year Plan** को मजबूती देने के लिए **₹4,000 करोड़** की रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट का ऐलान किया है। इस समझौते से क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक और डिजिटल पेमेंट के नए रास्ते खुलेंगे, जो भारतीय कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए बड़े अवसर साबित हो सकते हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया भूटान यात्रा ने दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई दी है। भारत सरकार ने भूटान के 2024-2029 के 13th Five Year Plan के तहत ₹4,000 करोड़ की राशि मंजूर की है, जिसका मुख्य उद्देश्य वहां की औद्योगिक जरूरतों को पूरा करना और एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भरता लाना है।
रेल कनेक्टिविटी और इंफ्रा का जाल
इस समझौते में लॉजिस्टिक्स को सुधारने पर सबसे ज्यादा जोर है। गेलफू (Gelephu) से कोकराझार और सामत्से (Samtse) से बनारहाट के बीच प्रस्तावित रेल लिंक ट्रेड बैरियर्स को कम करेंगे। भारतीय इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए यह एक बड़ा मौका है, क्योंकि आने वाले समय में इन प्रोजेक्ट्स के लिए बड़े ठेके निकलने की उम्मीद है।
हाइड्रोपॉवर और एनर्जी सेक्टर
भूटान की औद्योगिक प्रगति के लिए एनर्जी बैकबोन की तरह काम करेगी। गासा में 500 KW के लुनाना हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट की आधारशिला इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें भारत अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग करेगा।
डिजिटल क्रांति और UPI
दोनों देशों के बीच अब UPI (Unified Payments Interface) सेवा भी शुरू हो चुकी है। इससे न केवल ट्रेड आसान होगा, बल्कि भूटान के नागरिकों के लिए भारत में टूरिज्म और पेमेंट करना बेहद सहज हो जाएगा। साथ ही, 'गेलफू माइंडफुलनेस सिटी' के लिए असम के हाटीसार में इमिग्रेशन चेक पोस्ट बनाने की योजना है, जो इन्वेस्टर्स के लिए आवाजाही आसान बनाएगी।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को इन सरकारी प्रोजेक्ट्स के ऑर्डर फ्लो और एग्जीक्यूशन टाइमलाइन पर नजर रखनी चाहिए। हालांकि, पहाड़ी इलाकों में काम करने की चुनौतियों को देखते हुए, जिन भारतीय कंपनियों को ये प्रोजेक्ट्स मिलेंगे, उनकी भविष्य की कमाई इन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को कितनी कुशलता से पार करती है, इस पर निर्भर करेगी।
