IAEA Report: ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर अभी मरम्मत नहीं, कच्चे तेल में बनी रहेगी अस्थिरता

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
IAEA Report: ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर अभी मरम्मत नहीं, कच्चे तेल में बनी रहेगी अस्थिरता

IAEA ने खुलासा किया है कि 2025 और 2026 में हुए हमलों के बाद भी ईरान अपनी न्यूक्लियर साइट्स को फिर से नहीं बना रहा है। हालाँकि, **60%** एनरिच्ड यूरेनियम का स्टॉक अभी भी चिंता का विषय है। इस भू-राजनीतिक तनाव ने क्रूड ऑयल के दामों में अस्थिरता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ रहा है।

न्यूक्लियर साइट्स की मौजूदा स्थिति

इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रोसी ने यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) को स्पष्ट किया है कि जिन ईरानियन न्यूक्लियर फैसिलिटीज को सैन्य हमलों में नुकसान पहुंचा था, उनमें अभी कोई मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ है। फिलहाल ईरान के पास 440.9 किलोग्राम का 60% एनरिच्ड यूरेनियम स्टॉक मौजूद है, जिसकी स्थिति पर एजेंसी पूरी तरह निगरानी नहीं रख पा रही है।

क्रूड ऑयल और भारतीय बाजार पर असर

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें हैं। मिडल ईस्ट में जारी इस तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्यूल की कीमतें बेहद संवेदनशील बनी हुई हैं। भारत, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, वहां ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय रुपये की वैल्यू, घरेलू महंगाई (Inflation) और एविएशन, लॉजिस्टिक्स व केमिकल सेक्टर की कंपनियों के मुनाफे पर पड़ रहा है।

कूटनीतिक गतिरोध और निवेशकों के लिए सीख

अमेरिका और अन्य UNSC सदस्य देशों का दबाव जारी है, लेकिन रूस और चीन के ईरान के पक्ष में खड़े होने से मामला उलझ गया है। यह कूटनीतिक गतिरोध यह संकेत देता है कि फिलहाल कोई फौरी समाधान निकलने की उम्मीद कम है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे क्रूड ऑयल की कीमतों के रुझान और IAEA की भविष्य की रिपोर्ट्स पर नजर रखें, क्योंकि जब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक बाजार में यह रिस्क प्रीमियम बना रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.