हंगरी ने अपने देश से रूसी मिशन के **10** सदस्यों को बाहर निकालने का आदेश दिया है। यह कदम पिछली सरकार की रूस-समर्थक नीतियों से एक बड़ा ब्रेक है और यूरोपियन यूनियन की सुरक्षा मानकों के साथ जुड़ने का संकेत है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।
हंगरी सरकार ने बुडापेस्ट स्थित रूसी राजनयिक मिशन के 10 सदस्यों को देश छोड़ने का औपचारिक आदेश दिया है। विदेश मंत्री अनीता ओर्बान (Anita Orbán) ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लेना अनिवार्य था। उन्होंने आरोप लगाया कि ये व्यक्ति 'वियना कन्वेंशन' के तहत अपनी राजनयिक स्थिति के अनुकूल गतिविधियों में शामिल नहीं थे।
नई सरकार, नई दिशा
यह निष्कासन मई 2026 में पदभार संभालने वाले प्रधानमंत्री पीटर मैग्यार (Péter Magyar) के कार्यकाल में विदेश नीति का एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। मैग्यार प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने पूर्ववर्ती विक्टर ओर्बान (Viktor Orbán) की रूस-समर्थक नीतियों को पीछे छोड़कर अब सीधे यूरोपियन यूनियन (EU) और नाटो (NATO) के सुरक्षा फ्रेमवर्क के साथ मजबूती से आगे बढ़ना चाहते हैं।
बाजार पर असर का जोखिम
मॉस्को ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए 'कठोर और दर्दनाक' बदला लेने की चेतावनी दी है। ग्लोबल मार्केट में निवेशकों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि इससे एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security) पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। यूरोप अभी भी काफी हद तक रूसी एनर्जी सप्लाई पर निर्भर है, इसलिए ऐसी कूटनीतिक तनातनी कमोडिटी मार्केट में कीमतों में उतार-चढ़ाव और अस्थिरता को बढ़ा सकती है।
फिलहाल, बाजार विश्लेषक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि यह राजनयिक घर्षण क्या आर्थिक और ट्रेड संबंधी दबावों में बदल सकता है, जो आने वाले समय में यूरोप की स्थिरता को प्रभावित करे।
