यमन के अदन में राष्ट्रपति महल पर हुए हुती विद्रोही मिसाइल हमले में **2** सुरक्षा गार्डों की जान चली गई है। गनीमत रही कि वहां मौजूद सरकारी अधिकारी सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना से गल्फ ऑफ अदन में तनाव बढ़ गया है, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण शिपिंग रूट है।
यमन में हुती विद्रोहियों द्वारा अदन स्थित राष्ट्रपति महल को निशाना बनाकर की गई मिसाइल फायरिंग ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इस हमले में सरकारी अधिकारी सुरक्षित रहे, लेकिन घटना में 2 सुरक्षा गार्डों की जान गई है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है यह चिंताजनक?
अदन का इलाका रेड सी (Red Sea) और गल्फ ऑफ अदन के काफी करीब है। भारत के लिए यह समुद्री रास्ता यूरोप और मिडिल ईस्ट के साथ व्यापार की लाइफलाइन है। अगर इस रूट पर तनाव बढ़ता है, तो शिपिंग कंपनियों का बीमा (Insurance Premium) और माल ढुलाई का खर्चा सीधे बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में, जो कंपनियां इस रास्ते पर निर्भर हैं, उनके मुनाफे पर दबाव आना तय है।
क्रूड ऑयल पर असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में कोई भी तेजी हमारे घरेलू महंगाई दर (Inflation) को बढ़ा सकती है। इसका सीधा असर पेंट, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन जैसे सेक्टर्स पर पड़ेगा, जिनकी लागत कच्चे तेल से जुड़ी है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों को आने वाले दिनों में शिपिंग लेन की सुरक्षा और मिडिल ईस्ट के घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि यह सीधे तौर पर भारतीय इकोनॉमी और इंपोर्ट-हैवी इंडस्ट्रीज की ऑपरेटिंग कॉस्ट को प्रभावित कर सकता है।
