पाकिस्तान के नरोवाल जिले में 21 अगस्त को एक सदी पुराने हिंदू मंदिर को गिरा दिया गया। इसे लेकर स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि मदरसा विस्तार के लिए जमीन हथियाने की मंशा से यह विध्वंस किया गया है।
पंजाब के नरोवाल जिले के सिराज गांव में स्थित 1,000 वर्ग मीटर में फैला यह मंदिर 21 अगस्त, 2026 को पूरी तरह नष्ट हो गया। इस घटना ने अल्पसंख्यक अधिकार समूहों और सरकारी तंत्र के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।
विध्वंस या हादसा?
पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी समेत कई अल्पसंख्यक प्रतिनिधियों का आरोप है कि इस मंदिर को जानबूझकर गिराया गया ताकि बगल में स्थित मदरसे का विस्तार किया जा सके। वहीं, दूसरी ओर सरकारी अधिकारियों का दावा है कि मानसून की भारी बारिश के कारण इमारत पहले ही कमजोर हो चुकी थी और यह ढांचा अपने आप गिर गया। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि मंदिर गिरने के बाद वहां से कीमती धातु के हिस्से भी गायब कर दिए गए, जो सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है।
इवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) की विफलता
इस पूरे मामले में इवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, इसी साल जनवरी में बोर्ड ने इस संपत्ति को सील करने और अवैध कब्जेदार को हटाने का आदेश दिया था। इसके बावजूद, अगस्त तक यह साइट असुरक्षित बनी रही और अतिक्रमण का शिकार होती रही। यह साफ दिखाता है कि आदेश जारी होने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर उसे लागू करने में कितनी बड़ी लापरवाही बरती गई।
आगे क्या होगा?
फिलहाल यह मामला एडिशनल होम सेक्रेटरी के पास एक याचिका के रूप में लंबित है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस कथित अतिक्रमण की जांच कराएगी या इस ऐतिहासिक विरासत को फिर से खड़ा करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी।
