यमन के अदन एयरपोर्ट पर हमलों और बेलग्रेड में इजरायली दूतावास की सुरक्षा में सेंध के बाद ग्लोबल तनाव बढ़ गया है। निवेशक अब रेड सी (Red Sea) शिपिंग रूट, एनर्जी प्राइसेज और लॉजिस्टिक लागत पर इसके असर को लेकर सतर्क हैं।
मिडिल ईस्ट और यूरोप में सुरक्षा हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। यमन के अल-जौफ प्रांत में एक हवाई हमले में 14 नागरिकों की मौत हुई है और 15 लोग घायल हुए हैं। इसके साथ ही, हूती विद्रोहियों ने अदन एयरपोर्ट को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं, जिसके कारण मुंबई और काहिरा जैसे बड़े शहरों की फ्लाइट्स का रूट बदलना पड़ा है।
ग्लोबल ट्रेड पर सीधा असर
यमन का संकट रेड सी के लिए खतरा बन गया है। बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य, जो ग्लोबल शिपिंग का मुख्य रास्ता है, वहां मिलिट्री एक्टिविटी से जहाजों का इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ सकता है। कंपनियों को अब लंबे और महंगे रूट अपनाने पड़ सकते हैं, जिसका सीधा असर गुड्स और एनर्जी के दाम पर पड़ना तय है। ताइज शहर में भी मानवीय संकट गहरा गया है, जहां हूती बलों ने पानी की सप्लाई रोक दी है, जिससे 30 लाख निवासी प्रभावित हुए हैं।
यूरोप तक फैली चिंता
तनाव केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है। बेलग्रेड में इजरायली दूतावास पर हुए हमले को सर्बियाई सरकार ने आतंकी घटना माना है। गाजा और वेस्ट बैंक में जारी सैन्य ऑपरेशंस के बीच इस तरह की घटनाएं ग्लोबल निवेशकों के लिए 'रिस्क प्रीमियम' को बढ़ा रही हैं। अब बाजार की नजर एनर्जी प्राइसेज और फ्रेट कॉस्ट पर टिकी है, क्योंकि किसी भी और बढ़ोत्तरी से ग्लोबल सप्लाई चेन पर भारी दबाव पड़ सकता है।
