Global Conflict: सैन्य खर्च का आंकड़ा **$2.9 ट्रिलियन** के पार, निवेशकों के लिए बढ़ा रिस्क

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AuthorNeha Patil|Published at:
Global Conflict: सैन्य खर्च का आंकड़ा **$2.9 ट्रिलियन** के पार, निवेशकों के लिए बढ़ा रिस्क

संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक नई रिपोर्ट ने दुनिया भर में बढ़ते सैन्य खर्च और संघर्षों के मानवीय संकट पर चिंता जताई है। साल 2025 में मिलिट्री स्पेंडिंग रिकॉर्ड **$2.9 ट्रिलियन** पहुंच गई है, जिसका सीधा असर ग्लोबल सप्लाई चेन और ESG इन्वेस्टमेंट्स पर पड़ रहा है।

आर्थिक प्राथमिकताएं बदलीं

यूनाइटेड नेशंस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में कुल 37,000 नागरिकों की मौत हुई है। इसमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि संघर्षों में मरने वालों में हर 4 में से 1 महिला है, जो 2021 के मुकाबले दोगुना है। जहां एक तरफ डेवलपमेंट एड के लिए फंड कम हो रहा है, वहीं ग्लोबल मिलिट्री एक्सपेंडिचर $2.9 ट्रिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह डेटा साफ दिखाता है कि दुनिया भर की सरकारें अब डिफेंस और सिक्योरिटी को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही हैं।

ESG इन्वेस्टिंग और रिस्क फैक्टर

यह स्थिति ESG (एनवायरनमेंटल, सोशल और गवर्नेंस) निवेशकों के लिए एक जटिल चुनौती लेकर आई है। दुनिया के उन क्षेत्रों में लगभग 75 करोड़ महिलाएं संघर्ष वाले इलाकों के पास रह रही हैं, जहां आर्थिक स्थिरता न के बराबर है। इसके अलावा, युद्ध प्रभावित इलाकों में सप्लाई चेन में देरी और इन्फ्लेशन का दबाव भी बढ़ रहा है, जो केवल स्थानीय कंपनियों ही नहीं, बल्कि ग्लोबल मार्केट को भी प्रभावित कर रहा है।

टेक्नोलॉजी और भविष्य की चुनौती

रिपोर्ट में AI-इनेबल्ड सिस्टम और लॉन्ग-रेंज ड्रोन्स के बढ़ते इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए हैं। साथ ही, शांति वार्ता में महिलाओं की भागीदारी घटकर महज 5% रह गई है, जिसे विश्लेषक संघर्ष लंबा खिंचने का मुख्य कारण मान रहे हैं। निवेशकों के लिए आने वाली तिमाहियों में डिफेंस बजट के रुझान और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.