जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz के सामने गहरा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। CDU पार्टी को Mecklenburg-Western Pomerania और Berlin के चुनावों में ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा है, जिससे जर्मनी की भविष्य की नीतियों पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
जर्मनी में सत्ताधारी पार्टी Christian Democratic Union (CDU) के लिए इस हफ्ते के नतीजे किसी झटके से कम नहीं रहे। Mecklenburg-Western Pomerania में पार्टी को महज 5% वोट मिले, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद से उनका सबसे खराब प्रदर्शन है। वहीं, बर्लिन में भी पार्टी 20% वोट के साथ पिछड़ गई और Left party 24.5% वोट पाकर आगे निकल गई।
AfD की बढ़ती ताकत से बढ़ी चिंता
चुनावों में 'Alternative for Germany' (AfD) पार्टी का दबदबा बढ़ा है। AfD ने Mecklenburg-Western Pomerania में 37% और बर्लिन में 15.7% वोट हासिल किए हैं। भले ही AfD अभी सरकार बनाने की स्थिति में न हो, लेकिन उनका यह प्रदर्शन चांसलर Merz के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। निवेशकों को डर है कि इससे यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में 'पॉलिसी पैरालिसिस' (नीतिगत पक्षाघात) की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसका असर Euro की मजबूती और यूरोपीय बाजारों पर पड़ सकता है।
आर्थिक सुधारों पर मंडराया संकट
चांसलर Merz ने इन नतीजों को 'डिजास्टर' करार दिया है, लेकिन उन्होंने अपने आर्थिक सुधारों के एजेंडे पर अडिग रहने का संकेत दिया है। उनका तर्क है कि देश की आर्थिक सुस्ती को दूर करने के लिए कड़े कदम उठाने जरूरी हैं। हालांकि, अपनी ही पार्टी के भीतर और विपक्ष से मिल रहे कड़े विरोध के कारण उन्होंने अपनी न्यूयॉर्क की UN जनरल असेंबली की यात्रा भी रद्द कर दी है।
निवेशकों के लिए क्या है अहम?
जर्मनी यूरोप का इकॉनमिक इंजन है, इसलिए वहां की राजनीतिक स्थिरता पर वैश्विक निवेशकों की पैनी नजर है। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि क्या चांसलर Merz अपना विधायी एजेंडा जारी रख पाएंगे या राजनीतिक दबाव के चलते नेतृत्व और नीतियों में बदलाव की नौबत आएगी। जो निवेशक जर्मन मार्केट से जुड़े हैं, उन्हें अब सरकारी नीतियों में किसी भी बड़े बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
