रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कालिनिनग्राद क्षेत्र को लेकर सख्त तेवर अपनाते हुए पश्चिमी देशों को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस भू-राजनीतिक तनाव ने ग्लोबल कमोडिटी मार्केट और कच्चे तेल की कीमतों पर अनिश्चितता के बादल गहरा दिए हैं।
सैन्य कार्रवाई की चेतावनी और वैश्विक हलचल
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कर दिया है कि अगर NATO कालिनिनग्राद को अलग-थलग करने की कोशिश करता है, तो रूस अपनी पूरी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल करेगा। भले ही NATO ने इन दावों को खारिज करते हुए अपनी गतिविधियों को रक्षात्मक बताया है, लेकिन बढ़ती बयानबाजी ने फाइनेंशियल एनालिस्ट्स की चिंता बढ़ा दी है।
भारतीय शेयर बाजार पर क्या होगा असर?
जब भी दुनिया में ऐसा तनाव पैदा होता है, तो मार्केट में 'रिस्क-ऑफ' (Risk-off) का माहौल बन जाता है। निवेशक इक्विटी से अपना पैसा निकालकर सोने या सरकारी बॉन्ड्स जैसे सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं। इसके चलते Nifty और Sensex में वोलाटिलिटी बढ़ सकती है, क्योंकि विदेशी निवेशक (FIIs) इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं।
क्रूड ऑयल और भारत का इम्पोर्ट बिल
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। ऐसे में किसी भी भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर क्रूड ऑयल के दाम पर पड़ता है। अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर भारत के इम्पोर्ट बिल, महंगाई दर और एविएशन व ट्रांसपोर्टेशन जैसे फ्यूल-डिपेंडेंट सेक्टर्स के मुनाफे पर पड़ेगा।
अगले कुछ दिनों में निवेशकों को नजर रखनी होगी कि क्या यह केवल कूटनीतिक बयानबाजी है या सप्लाई चेन में कोई वास्तविक रुकावट आती है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (Rupee) की चाल भी मार्केट सेंटीमेंट तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
