पश्चिम एशिया में तनाव: तेल **8%** चढ़ा, सोना भी भागा! क्या फेड रोकेगा रेट कट?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
पश्चिम एशिया में तनाव: तेल **8%** चढ़ा, सोना भी भागा! क्या फेड रोकेगा रेट कट?
Overview

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में हड़कंप मचा दिया है। ईरान पर हुए हमलों के बाद तेल की कीमतों में अचानक भारी उछाल आया है, वहीं सोने जैसी सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों में भी तेजी देखी गई। इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम ने महंगाई (inflation) की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) के लिए ब्याज दरों में कटौती (interest rate cuts) की उम्मीदों पर ग्रहण लग सकता है।

### भू-राजनीतिक उथल-पुथल से तेल में भारी तेज़ी, बाज़ार का फोकस बदला

सोमवार को वैश्विक वित्तीय बाजारों में तब हड़कंप मच गया जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद सीधे सैन्य टकराव की स्थिति बन गई। इस अचानक हुई भू-राजनीतिक घटना ने निवेशकों में घबराहट पैदा कर दी, जिससे शुरुआती कारोबार में US इक्विटी फ्यूचर्स 1% से अधिक गिर गए, हालांकि बाद में यह गिरावट करीब 0.8% तक सीमित हो गई। एशियाई शेयर बाजारों में भी गिरावट दिखी, जापान का Nikkei 225 इंडेक्स 1.5% से ज्यादा लुढ़क गया। मार्केट की घबराहट का मुख्य संकेतक, CBOE Volatility Index (VIX), में भी बड़ी बढ़ोतरी देखी गई।

### सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं के बीच ऊर्जा की कीमतें बढ़ीं

ऊर्जा बाजारों पर इसका सबसे सीधा और बड़ा असर पड़ा। सप्लाय बाधित होने की आशंकाओं के बीच ट्रेडर्स ने आनन-फानन में तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया। अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड ऑयल (US benchmark crude oil) लगभग 8% चढ़ गया, जो बाद में लगभग $71.00 प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, ब्रेंट क्रूड (Brent crude) 6.2% उछलकर $77.38 प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह मूल्य वृद्धि सीधे तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सप्लाई बाधित होने की चिंताओं से जुड़ी है, जो वैश्विक तेल और LNG आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा संभालता है। ट्रेडर्स अब इस संघर्ष की अवधि और दायरे पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि ऐतिहासिक घटनाएं बताती हैं कि ऐसे हालात कीमतों में बड़ा प्रीमियम जोड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए, जून 2025 में क्षेत्रीय तनाव के कारण तेल की कीमतें $69 से बढ़कर $74 प्रति बैरल हो गई थीं, और यदि यह व्यवधान लंबा चला तो कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। इसका असर गैसोलीन (gasoline) और अन्य ईंधनों पर भी पड़ेगा, और विश्लेषकों का मानना है कि अगर सप्लाई लगातार बाधित रहती है तो यह वैश्विक महंगाई (global inflation) को और बढ़ा सकता है।

### निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़े, सोना चमका

बढ़ती अनिश्चितता के बीच, निवेशकों ने पारंपरिक सुरक्षित निवेश (safe-haven assets) की ओर रुख किया। सोने की कीमत में 2.4% की उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई, जो लगभग $5,371 प्रति औंस के करीब पहुंच गया। यह उछाल वैसे पैटर्न के अनुरूप है जहां भू-राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक अस्थिरता के समय सोने की कीमतें अक्सर चढ़ती हैं। 2024 और 2025 के दौरान, सेंट्रल बैंकों की सोने की खरीद और आम निवेशकों की घबराहट के चलते सोने ने एक सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत प्रदर्शन किया है।

### महंगाई का खतरा और फेड का दुविधा

यह संघर्ष सेंट्रल बैंकों के लिए विशेष रूप से मुश्किल समय पर आया है। हाल के आंकड़ों से पता चला है कि पिछले महीने अमेरिकी थोक महंगाई (US wholesale inflation) उम्मीद से ज्यादा 2.9% रही, जो पहले से ही ब्याज दर नीति के लिए संभावित बाधाओं का संकेत दे रही थी। अब ऊर्जा कीमतों में आई इस नई तेज़ी से व्यापक महंगाई (inflationary pressures) के फिर से बढ़ने का बड़ा जोखिम है, जो 2025 के अंत में दिख रहे महंगाई कम होने के रुझान को रोक सकती है। यह अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की स्थिति को जटिल बना देता है। जनवरी 2026 में 3.5%-3.75% पर ब्याज दरों को स्थिर रखने के बाद, और 17-18 मार्च की बैठक में एक और ठहराव (pause) की उम्मीदों के बीच, नीति निर्माताओं को एक नाजुक संतुलन बनाना होगा। महंगाई का यह बढ़ा हुआ आंकड़ा और वर्तमान भू-राजनीतिक झटका फेड को अपेक्षित दर में कटौती (rate cuts) में देरी करने पर मजबूर कर सकता है, जो बाजार में आशावाद का स्रोत थे। विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 की शुरुआत में अमेरिकी महंगाई 3% से ऊपर जा सकती है, जो यूरोप में उम्मीद की जा रही महंगाई कम होने की प्रवृत्ति से अलग है।

### सेक्टर रोटेशन और AI पर असर

इस भू-राजनीतिक संकट ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उन थीम्स से भी बाजार का ध्यान जबरन हटा दिया है, जिन्होंने हालिया ट्रेडिंग साइकल्स पर दबदबा बनाए रखा था। 2026 की शुरुआत में, निवेशक लगातार टेक्नोलॉजी और AI से जुड़े शेयरों से बाहर निकल रहे थे, जिन्होंने पहले महत्वपूर्ण वैल्यूएशन हासिल की थी, और 'वास्तविक अर्थव्यवस्था' (real economy) से जुड़े सेक्टर्स में निवेश कर रहे थे। ऊर्जा (energy), इंडस्ट्रियल्स (industrials) और कंज्यूमर डिफेंसिव (consumer defensive) स्टॉक्स ने बाजार में बढ़त हासिल की, जिसमें हाल की भू-राजनीतिक घटनाओं के तुरंत बाद ऊर्जा स्टॉक्स में लगभग 5% की बढ़ोतरी देखी गई। ExxonMobil और Chevron जैसी कंपनियों ने साल-दर-तारीख (YTD) में उल्लेखनीय लाभ देखा है, जिसका फायदा बढ़ती तेल कीमतों से मिला है, भले ही व्यापक टेक सेक्टर वैल्यूएशन (valuations) और पूंजीगत व्यय (capital expenditure) पर जांच का सामना कर रहा हो। जबकि AI में निवेश जारी है, बाजार की धारणा विकसित हो रही है, जिसमें स्पष्ट कमाई (monetization) के रास्तों और सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर (supporting infrastructure) को प्रदर्शित करने वाली कंपनियों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

### लंबी अवधि का जोखिम और भविष्य की राह

मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों ने ऐतिहासिक रूप से लगातार आर्थिक दबाव डाला है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में होर्मुज जलडमरूमध्य की महत्वपूर्ण भूमिका का मतलब है कि किसी भी लंबे व्यवधान के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, जो माल ढुलाई की लागत (freight costs) और दुनिया भर में उपभोक्ता कीमतों (consumer prices) को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि संघर्ष सीमित रहता है तो तेल की कीमतें $70-$80 की सीमा में स्थिर हो सकती हैं, लेकिन कीमतों के $100 या $130 प्रति बैरल तक पहुंचने का जोखिम बना हुआ है, जो 2007-2008 के तेल झटके के स्तर जैसा है। फेडरल रिजर्व के अगले कदमों पर बारीकी से नजर रखी जाएगी, क्योंकि बाजार अब 2026 की शुरुआत के बजाय गर्मियों या उसके बाद तक दर में कटौती (rate cuts) की उम्मीदों को समायोजित कर रहा है। भू-राजनीतिक जोखिम, लगातार बढ़ती महंगाई और बदलती केंद्रीय बैंक नीतियों का यह संगम एक जटिल माहौल बनाता है, जो बाजार में लगातार अस्थिरता (volatility) और रक्षात्मक संपत्तियों (defensive assets) व वास्तविक मूल्य (tangible value) वाले सेक्टर्स पर अधिक जोर देने का संकेत देता है।

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