यूक्रेन में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता पैदा कर दी है। भारतीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) की कीमतों में हलचल, सप्लाई चेन में बाधा और FII निवेश के मोर्चे पर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
यूक्रेन में छिड़े संघर्ष ने एक बार फिर ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में खलबली मचा दी है। बुनियादी ढांचे पर हवाई हमलों की खबरों के बाद वैश्विक निवेशक सतर्क हो गए हैं। भारतीय बाजारों के लिए इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह तनाव इकोनॉमी को कैसे प्रभावित करेगा।\n\n### कच्चे तेल की कीमतों का डर\n\nभारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर Brent Crude की कीमतों पर पड़ता है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊपर रहती हैं, तो भारत का ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) बढ़ सकता है और महंगाई का दबाव बढ़ेगा, जिसका बुरा असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा।\n\n### सप्लाई चेन और कमोडिटी पर असर\n\nयूक्रेन दुनिया में सूरजमुखी तेल और फर्टिलाइजर का बड़ा एक्सपोर्टर है। वहां के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर हमलों की वजह से सप्लाई चेन में बाधा आ रही है। घरेलू बाजार में एडिबल ऑयल और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए इनपुट कॉस्ट बढ़ना एक बड़ी चुनौती है, जो उनके मार्जिन को प्रभावित कर सकती है।\n\n### FII और मार्केट सेंटीमेंट\n\nभू-राजनीतिक तनाव के समय विदेशी निवेशक (FII) अक्सर जोखिम कम करने के लिए उभरते बाजारों (Emerging Markets) से अपना पैसा निकालने लगते हैं। भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह यही FII फ्लो है। हालांकि, Kherson क्षेत्र में 6 दिन के अमेरिकी समर्थित युद्धविराम की बात कही गई थी, लेकिन शांति वार्ता के विफल होने के डर से निवेशक अभी भी सहमे हुए हैं।\n\nअब निवेशकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ग्लोबल सेंट्रल बैंक महंगाई को लेकर क्या रुख अपनाते हैं और कच्चे तेल की चाल क्या रहती है।
