अक्टूबर 2026 के ताजा सैटेलाइट डेटा ने गाजा की स्थिति को लेकर भयावह तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, वहां की 82% इमारतें या तो क्षतिग्रस्त हैं या पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। निर्माण सामग्री पर सख्त पाबंदियों और क्षेत्रीय तनाव के कारण पुनर्निर्माण का काम रुका हुआ है, जो मिडिल ईस्ट में बड़े आर्थिक और मानवीय संकट का संकेत है।
अक्टूबर 2026 की सैटेलाइट तस्वीरों से गाजा पट्टी के मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक नजर आ रहे हैं। UN Satellite Centre (UNOSAT) के डेटा के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में संघर्ष के दौरान वहां की कुल संरचनाओं का 82% हिस्सा या तो ढह चुका है या बुरी तरह डैमेज हो चुका है। घने शहरी इलाके अब मलबे के मैदानों में तब्दील हो गए हैं।
पुनर्निर्माण पर लगा ब्रेक
Planet Labs PBC द्वारा ली गई तस्वीरों से साफ है कि सीजफायर के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। राफा और जबालिया जैसे घने आबादी वाले इलाके अब मिलिट्री आउटपोस्ट में बदल चुके हैं। सुरक्षा कारणों से निर्माण सामग्री की एंट्री पर लगी कड़ी पाबंदियों के कारण वहां दोबारा निर्माण कार्य शुरू करना नामुमकिन जैसा हो गया है।
मानवीय और आर्थिक संकट
लगभग 20 लाख विस्थापित लोगों के लिए स्थिति बेहद कठिन बनी हुई है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव और अल-अव्दा अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण मेडिकल केंद्रों के नष्ट होने से रिकवरी की चुनौती और बढ़ गई है। बेरोजगारी दर लगभग 100% के करीब है और स्थानीय आबादी पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय राहत सामग्री पर निर्भर है।
भारतीय बाजार पर क्या है असर?
हालांकि इस घटनाक्रम का भारतीय शेयर बाजार पर कोई सीधा असर नहीं है, लेकिन यह ग्लोबल मार्केट के लिए एक बड़ा 'Geopolitical Risk' है। मिडिल ईस्ट की अस्थिरता कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को प्रभावित कर सकती है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और ट्रेड बैलेंस पर पड़ता है। निवेशकों की नजरें अब निशस्त्रीकरण और पुनर्निर्माण की बातचीत पर टिकी हैं, क्योंकि वार्ता के डेडलॉक में रहने तक वैश्विक अनिश्चितता बनी रहेगी।
